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किस्सा कांशीराम का

किस्सा कांशीराम का #16: एक वोट और एक नोट की कहानी

1988 में इलाहबाद संसदीय सीट का उपचुनाव हुआ. वहां से मान्यवर साहब ने अपना नामांकन भरा. जहाँ एक तरफ कांग्रेस पार्टी मैदान में थी...

किस्सा कांशीराम का #15: मैं सिक्योरिटी इसलिए नहीं रखता क्योंकि मैं मरना नहीं चाहता

Kissa Kanshiram Ka 15: बात 1978 की है जब मान्यवर साहेब कांशीराम लुधियाना में स्थित भगवान वाल्मीकि धर्मशाला में कैडर कैम्प लगाने के लिए...

किस्सा कांशीराम का #14: यदि सब चमार नौकर बनकर सरकार की सेवा में ही लगे रहे तो अपने समाज की सेवा कौन करेगा?

किस्सा कांशीराम का: बात 1975 की है. मान्यवर साहेब कांशीराम के एक साथी थे, शिव धीर, जो दिल्ली परिवहन में बस कैंडेक्टर थे. उन...

किस्सा कांशीराम का #13: मैं पहली बार 1973 में पुणे से भीमा कोरेगांव साइकिल पर गया था

साहेब ने एक बार सफर करते हुए अपने एक साथी से कहा था कि जब मैं पुणे में अपने आंदोलन के लिए जद्दो जहद...

किस्सा कांशीराम का #12: ‘पोनी टाइप’ नेतृत्व की नालायकी के कारण पंजाब से अलग हो

24 मार्च 1986 को 'बहुजन संगठन' में लिखे एक लेख में साहिब ने खुलासा किया था कि जनवरी (पहले सप्ताह) 1983 में होशियारपुर (रोशन...

किस्सा कांशीराम का #11: आज मैं तुम्हें खाना नहीं खिला सकता, क्योंकि आज मेरी जेब में पैसे नहीं हैं

आपकी अंतरात्मा को झकझोर देने वाला ये वाक्या 1985 में हुए बिजनौर (उत्तर प्रदेश) उपचुनाव का है, हुआ यूं कि कुमारी मायावती बिजनौर उपचुनाव...

किस्सा कांशीराम का #10: जूता बेचने वाला नहीं मिला तो चप्पल बेचने वाला लगा कर उद्योग मंत्री सुनील शास्त्री को हराया

1989 में (लोकसभा चुनाव के बाद) जब 'संडे वीक' रिपोर्टर स्वयं-सची जैन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि हम मानते हैं कि...

किस्सा कांशीराम का #9: पैसा चाहिए दिमाग चाहिए तो बामसेफ का स्विच दबाता हूँ कार्यकर्ताओं की जरूरत हो तो डी एस 4 स्विच दबाता

साप्ताहिक 'दीनमन' (19-25) 1987 में दिल्ली के करोलबाग कार्यालय में साहिब से लम्बा साक्षात्कार किया. इंटरव्यू शुरू होने से पहले साहिब ने बताया कि...

किस्सा कांशीराम का #8: सुखद अटे है! तेज़ भागो, पीछे दौड़ता मुनीम कमरे का किराया लेने आ रहा है

पुणे में साहेब के संघर्ष भरे दिनों की कहानी. साहेब को नौकरी से इस्तीफा देने के बाद पुणे के पंजा मोहल्ले डिंकन जिमखाना के...

किस्सा कांशीराम का #6: राजीव गांधी मेरे पास आया और कहने लगा कि हमें भी आपकी सेवा करने का मौका दो

बहुजन समाज पार्टी द्वारा देश भर में  बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर जन्म शताब्दी वर्ष  के तेहत मनाये गये समारोहों की श्रंखला में 18 सितम्बर 1990...

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