नमोऽस्तु बुद्धाय विशुद्धबोधयेविशुद्धधर्मप्रतिभासबुद्धये।सद्धर्मपुण्योपगतानुबुद्धयेभवाग्रशून्याय विशुद्धबुद्धये॥(बोधिसत्त्वसमुच्चयानाम कुलदेवता, बुद्धस्तोत्र, 1)
महामानवों का चरित केवल इतिहास बनकर नहीं रहता, वह चरित सदैव कालजयी होता है। वह चरित प्रत्येक काल...
बुद्ध पूर्णिमा - बुद्ध का धम्म धूम-धड़ाके, दिखावे, फूहड़ प्रदर्शन, नाच गाने, शोरगुल और रैलियों का धम्म नहीं है. यह भाषणबाजी, वाद-विवाद, बौद्धिक वाणी...