किस्सा कांशीराम का #9: पैसा चाहिए दिमाग चाहिए तो बामसेफ का स्विच दबाता हूँ कार्यकर्ताओं की जरूरत हो तो डी एस 4 स्विच दबाता

साप्ताहिक ‘दीनमन’ (19-25) 1987 में दिल्ली के करोलबाग कार्यालय में साहिब से लम्बा साक्षात्कार किया. इंटरव्यू शुरू होने से पहले साहिब ने बताया कि सुबह 6.30 बजे बी. बी. सी के पत्रकार मार्क टली ने इसे कवर किया है. सुबह से पत्रकारों से घिरे हुए हैं. पिछले 10 दिनों से कुछ इस तरह चल रहा है ये सीरीज. सारे कार्यकर्ता चुप है मैं तो सिर्फ इंटरव्यू और इंटरव्यू दे रहा हूँ.

जब पत्रकार ने पूछा कि क्या आप कांग्रेस से सहमत नहीं होंगे? या शायद यह रिपब्लिकन पार्टी की तरह भंग हो जाएगा.

इस संबंध में साहिब का जवाब बहुत स्पष्ट था कि मैं समझौता क्यों करूंगा. पैसा, दिमाग, वोट, तीनों चीजें हैं मेरे पास. मैंने रिपब्लिकन पार्टी से सब कुछ सीखा है. मैंने सभी लोगों को रिपब्लिकन पार्टी चला रहे हैं देखा है. कमले, दादा साहब गायकवार, खोब्रागडा, कांग्रेस नेताओं से कहीं ज्यादा पढ़े लिखे थे- डॉ अम्बेडकर के लिए तैयार थे. अभी भी पीछे रह गया है. एक बड़ा कारण था पैसे की कमी.

दूसरा, प्रचार में कांग्रेस को हराया. मैंने इन चीजों को आधार बनाकर शुरू किया. पैसा चाहिए तो दिमाग चाहिए तो बामसेफ का स्विच दबाता हूँ. अगर श्रमिकों की जरूरत है, तो मैं डीएस-4 स्विच दबाता हूँ. देश के सारे चमार मेरे कार्यकर्ता है. अब बहुसंख्यक समाज की ठुकाई नहीं होने वाली है. आज प्रचार के मामले में कांग्रेस हमारा मुकाबला नहीं कर सकती. कांग्रेस के 20 दिन के प्रचार को अगले चुनाव में सिर्फ 5 दिन में हरा देंगे.

साहब ने एक और सवाल में कहा कि 1978 में हमने बामसेफ का निर्माण किया था. आज बामसेफ के पास दो लाख से ज्यादा सदस्य है सभी उच्च शिक्षित. तीन साल बाद हमने दलितों और समाज के लिए DS4 बनाया. यह एक गैर राजनीतिक दिग्गज संगठन था. कांशीराम ने भी दिल्ली नगर निगम को 1982 में और हरियाणा विधानसभा 1983 में जम्मू-कश्मीर के चुनावी मैदान में लिया था. पिटाई का अभ्यास करने के लिए, इस पिटाई के बाद ही हिम्मत मिली. इस व्यवस्था को हराने के लिए बहुजन समाज पार्टी का गठन हुआ था.

जब पत्रकार ने साहब से उप चुनाव में धांधली पर पूछा कि आप लोग बोट क्लब पर विरोध क्यों कर रहे हैं तो आप कोर्ट क्यों नहीं गए? तो उनका जवाब बहुत सटीक और स्पष्ट था कि हम जनता की अदालत में खड़े हैं. कम से कम जनता को ये भी पता होना चाहिए कि उनके वोट पर ब्राह्मण, बनियों की पार्टियां कैसे कब्जा करती हैं.


(स्रोत: मैं कांशीराम बोल रहा हूँ का अंश; लेखक: पम्मी लालोमजारा, किताब के लिए संपर्क करें: 95011 43755)

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