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मत-विमत

ओपिनियन: व्यक्तियों नहीं, प्रवृतियों पर बात हो!

विगत दिनों बहुजन राजनीतिक स्पेस में दो घटनाएँ घटित हुई, जिस पर सोशल मीडिया में काफी चर्चा रही. पहली घटना भीम आर्मी चीफ और...

ज्योतिबा फुले: आधुनिक भारतीय लोकतंत्र, सार्वभौमिक मताधिकार और आरक्षण के विचार के पिता

Jyotiba Phule: कहानी पुणे शहर में शुरू हुई, जहां प्रारंभिक 19वीं सदी के पुणे सार्वजनिक सभा (पुणे पब्लिक कौंसिल) शहर के मामलों का प्रबंधन...

राजनैतिक गठबंधन vs सामाजिक गठबंधन

सामाजिक गठबंधन: बहुजन समाज का स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की राह प्रस्तावना भारत एक ऐसा देश है जहाँ विविधता इसकी आत्मा में बसी है। विभिन्न विचारधाराएँ,...

मनुवादियों का सेलिब्रेशन समतावाद से भटकाव का द्योतक है

बहुजन आंदोलन का स्वाभिमान: उधारी के नायकों से मुक्ति की पुकार प्रस्तावना: एक चिंताजनक प्रवृत्ति का उदय आज के दौर में बहुजन समाज पार्टी (बसपा)...

बहुजन एवं मनुवादी राजनीति में इनके बुद्धिजीवियों की संबंधित भूमिका

बहुजन आंदोलन का संकट: अपने ही बुद्धिजीवियों से खतरा प्रस्तावना: एक आत्मघाती प्रवृत्ति का उभारआज बहुजन समाज के बीच एक ऐसी चर्चा आम हो चली...

Opinion: नीतिश कुमार दलित विरोधी हैं?

सवाल यह नहीं की बिहार में SC रिजर्वेशन 17% से बढ़ाकर 20 % कर दिया गया है. सवाल है अबादी के हिसाब से एस...

RS Praveen Kumar की लोकप्रियता का राज

तेलंगाना मे RS Praveen Kumar जी की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण ये भी है कि वो लगभग 10 साल तक TSWERIS (Telangana Social...

Statue of Equality : विश्व मानव कल्याण का संदेश है

जब बसपा की सरकार बनी तो मान्यवर साहेब ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश का अम्बेडकाराइजेशन करेगें। इसके लिए बहनजी ने संविधान सम्मत शासन,...

जाति व्यवस्था को मजबूत करना, समतामूलक समाज सृजन की राह में रूकावट

भारतीय समाज जाति, जातिवाद एवं छुआछूत की अमानवीय व्यवस्था पर समाज है। यहाँ आज भी योग्यता उसकी खुद की काबिलियत से नहीं बल्कि उसकी...

किस्सा कांशीराम का #11: आज मैं तुम्हें खाना नहीं खिला सकता, क्योंकि आज मेरी जेब में पैसे नहीं हैं

आपकी अंतरात्मा को झकझोर देने वाला ये वाक्या 1985 में हुए बिजनौर (उत्तर प्रदेश) उपचुनाव का है, हुआ यूं कि कुमारी मायावती बिजनौर उपचुनाव...

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