राष्ट्र-निर्माण के लिए अधिकार पथ भी आवश्यक: प्रो विवेक कुमार

जवाहर लाल नेहरू विवि में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विवेक कुमार ने दिल्ली स्थित जनपथ (इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक जाने वाली सड़क) का नाम बदलकर “कर्तव्यपथ” करने पर सरकार को आड़े हाथों लिया है और संविधान में आम नागरिकों को मिले अधिकारों का लाभ पूरा मिलने के लिए सरकार से अधिकार-पथ स्थापित करने की वकालत की है.

बकौल प्रोफेसर, “कर्तव्य पथ के साथ अधिकार पथ भी स्थापित किया जाना चाहिए क्योंकि अधिकार एवं कर्तव्य दोनों ही संविधान में नागरिकों को दिए गए हैं. जिस राष्ट्र में करोड़ों-करोड़ लोगों के पास अधिकार नहीं थे उन अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए संविधान में बाबासाहेब ने उन वंचितों के अधिकार सुनिश्चित किए ताकि वे भी राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान कर सके.”

प्रो विवेक कुमार यहीं नही रुके उन्होने सभी प्रकार के अधिकारों मसलन मौलिक व मानव अधिकार सभी का पूर्णत: लाभ दिया जाना सुनिश्चित करने के लिए कहा है.

उन्होने आगे कहा, “इस लिए अधिकार चाहे मौलिक हो या मानव अधिकार हों वो राष्ट्र-निर्माण से सीधे-सीधे जुड़े हुए हैं. प्रश्न उठता है कि क्या संविधान में दिए गए अधिकार संविधान के लागू होने के 72 वर्षों बाद भी शब्द एवं संविधान की मूल-भावनाओं में वंचितों के लिए लागू हो पाए हैं?”

इसी बात को जारी रखते हुए वे सभी नागरिकों खासकर इस देश में हजारों सालों से दबाएं गए, सामान्य मानव अधिकारों से भी वंचित किए गए समुदाओं की वकालत करते हुए कहा.

“अगर नहीं तो अधिकारों के प्रति- वो भी वंचित समाजों के अधिकारों के प्रति, नागरिकों में चेतना भरने के लिए अधिकार पथ भी स्थापित किया जाना चाहिए. तभी राष्ट्र निर्माण की गति तेज हो पाएगी.”

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