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Sunday, January 11, 2026
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किस्सा कांशीराम का

किस्सा कांशीराम का #5: पहले-पहल कुछ लोग मेरे बारे में अंदाज़ा लगाते थे कि ढेढ़ रुपये की टूटी चप्पल, फटी हुई पैंट-कमीज़ पहनने वाला...

बात 1977-78 की है, जिन दिनों साहेब दिल्ली में सरगर्म थे. लेकिन दिल्ली में साहेब की बात कोई भी सुनने को तैयार नहीं था....

कांशीराम का किस्सा #04: जो लोग अपने आप को ‘चूहड़ा’ या ‘चमार’ कहलवाने में बेईज्ज़ती महसूस करते हैं, हो सकता है वे खुद को...

 उपरोक्त शब्द साहेब कांशीराम ने 2001 में, गुरु नानक भवन (अमृतसर) में उस वक़्त कहे थे जब कैडर कैंप के दौरान साहेब की और...

कांशीराम का किस्सा #3: मेरा कोट कंधों से फटा है तो क्या हुआ? इससे अधिक तो मेरे समाज की गरीब औरतों की सलवार फटी...

बात अप्रैल की. जगह लंदन यूके वहां साहेब का ठिकाना 'अंबेडकर इंटरनेशनल मिशन’ और था. साहेब को बुद्ध विहार संस्था वालों ने एक कमरा...

किस्सा कांशीराम का 02: इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, बूटा सिंह और पिरथी सिंह ने बर्मिंघम (यूके) गुरु रविदास गुरुद्वारा से पैसा लिया पर मैंने...

किस्सा कांशीराम का 02: 1987 में जब इलस्ट्रेटेड वीकली के पत्रकार ने साहेब को सवाल किया कि आप कहते हो कि आपने कभी भी...

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