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Sunday, February 8, 2026
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समाज संस्कृति

चुनाव से पहले रामचरित मानस का मुद्दा : क्रांति नहीं, भ्रांति है, भटकाव है

भारत विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, भाषाओं और जलवायु वाला देश है, परन्तु इस लेख के संदर्भ में इसे विभिन्न जातियों का देश कहना अधिक उचित...

सकारात्मक एजेण्डा ही शोषित को सत्तारूढ़ कर सकता है

समतावाद का पथ और मनुवादी जाल भारत में बहुजन समाज को उसके स्वाभाविक एजेण्डे से विमुख करने हेतु तीनों मनुवादी दल—भाजपा, सपा और राजद—धर्म और...

किस्सा कांशीराम का #8: सुखद अटे है! तेज़ भागो, पीछे दौड़ता मुनीम कमरे का किराया लेने आ रहा है

पुणे में साहेब के संघर्ष भरे दिनों की कहानी. साहेब को नौकरी से इस्तीफा देने के बाद पुणे के पंजा मोहल्ले डिंकन जिमखाना के...

डॉ अम्बेडकर का आजादी में क्या योगदान था – Dr BR Ambedkar Contribution in Indian Freedom

यह प्रश्न केवल संघी या भाजपाई ही नहीं पूछते हैं बल्कि कांग्रेसी, गांधीवादी, वामपंथी, ब्राह्मणवादी, मनुवादी, मुस्लिम इत्यादि तक सब पूछते हैं. ख़ासकर जिन्होंने...

एन दिलबाग सिंह का कॉलम: मनुस्मृति और रामचरितमानस का विरोध किसी जाति विशेष के खिलाफ़ जहर नही

कुछ साथियों का मानना है कि मनुस्मृति या तुलसीदास द्वारा लिखी रामचरितमानस का विरोध बेवजह है. क्योंकि इनको कौन पढ़ता होगा या पढ़ते भी...

किसी को हराना या जिताना नहीं, बल्कि ‘मजलूमों की सत्ता’ है बसपा का लक्ष्य

बसपा की स्वतन्त्र अस्मिता और मीडिया का दुराग्रह भारत में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का उदय 1984 में मजलूमों की पुकार बनकर हुआ। अपनी स्वतन्त्र...

जन्मदिन विशेष: सामाजिक परिर्वतन की महानायिका व ‘राष्ट्र गौरव’ बहनजी

समतावाद का संकल्प और बहनजी का योगदान भारत में विषमतावादी व्यवस्था को ध्वस्त कर समतामूलक समाज की स्थापना की परम्परा सहस्राब्दियों से संनादति रही है।...

किस्सा कांशीराम का #7: 1973 में पहली बार पुणे से भीमा कोरेगांव साइकिल पर गया था

साहेब ने एक बार यात्रा की और अपने एक सहयोगी से कहा कि जब मैं पुणे में अपने आंदोलन के लिए लड़ रहा था,...

पौराणिक कथाएं – शूद्रों की गुलामी का षड्यंत्र ग्रंथ

विषमतावादी कथाओं का जाल और शूद्रों की गुलामी भारत का हिन्दू समाज वर्णव्यवस्था पर आधारित सहस्रों जातियों और उपजातियों में विखण्डित है। मैक्स मूलर और...

बहनजी व बसपा विरोध, बहुजन सरकारी अधिकारियों का धंधा है

बहुजन चेतना का संकट और बसपा की प्रासंगिकता हाल ही में हमारी भेंट एक दलित क्लास-2 गजेटेड अधिकारी से हुई। बातचीत में उन्होंने प्रश्न उठाया,...

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