एन दिलबाग सिंह का कॉलम: दलित राजनीति की असली मलाई

दलित समाज की राजनीति को समझना इतना आसान नही है क्योंकि ये समाज मानसिक गुलामी से बाहर आने को अभी तक तैयार नही दिखता. ये समाज हमेशा तैयार रहता है कि इनको कोई बेवकुफ बना दे ताकि ये औरों के गाने पर नागिन डांस कर सके.

75 सालों से अच्छे खासे वोटों वाले राज्यों में भी ये समाज नागिन डांस करने में ही व्यस्त है. कुछ लोगों को दलित राजनीति का मतलब मलाई खाना लगता है जबकि ये संघर्ष और एलान-ए-जंग है. सदियों पुरानी मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ़.

अब अगर सबको हर कदम पर मलाई ही मलाई चाहिये तो बेचारा वोटर ही क्यों लाइन में लगकर वोट करें? मैं तो कहता हूँ कि चुनाव की जरूरत ही क्या है, विचारधारा की भी क्या जरूरत है जब नजर मलाई पर ही है!

सच्चे अम्बेड़करवादी की परख तो बिना पद के ही की जा सकती है. अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग की आदत डालिये. एक दिन की गलती पूरे पाँच साल तक भुगतनी है, ये वोटिंग वाले दिन भुलना नही चाहिए.
एन दिलबाग सिंह
Tweet

बाबासाहेब जब आजादी के 20 साल पहले भी अछुतों के अधिकारों के लिए लड़ रहे थे तो क्या वो मलाई के लिए लड़ रहे थे? क्या उनको सच मे ही पता था कि उनके जीते जी देश आजाद भी हो जायेगा और वो कानून मंत्री भी बन जायेंगे?

मान्यवर जब साठ वाले दशक मे नौकरी छोड़कर दलितों-शोषितों को सामाजिक रूप से जागरूक करने के लिए चले तो क्या वो मलाई के लिए नौकरी छोड़ कर गए थे?

बहनजी सत्तर वाले दशक में जब मान्यवर के सामाजिक जागरूकता मिशन से जुड़ी (जब पार्टी तक नही बनी थी) तब क्या उनके दिमाग में मलाई खाने का ही सवाल था?

किसी भी पार्टी में जो लोग आज पदाधिकारी है, सही काम नही करेगा तो कल कोई दूसरा होगा. लेकिन, ये मलाई-वलाई के मुद्दे पर तो मान्यवर का मिशन ही दारू के पव्वों में बिकता नजर आयेगा. दलितों के सामाजिक और राजनैतिक उत्थान का मिशन मलाई खाने के लिए नही होता, ये समाज के दुख-दर्द, समस्याओं को समझने का मिशन है; और राजनैतिक सत्ता के जरिये उनके स्थाई समाधान का रास्ता तैयार करने का मिशन है. मलाई-वलाई करते रहने वाले बाघड़बिल्लों से भी सावधान रहने की जरुरत है, इन्ही अफवाहों ने सत्ता दलितों से कोसों दूर कर रखी है.

आप जब घर में बैठे कई-कई साल क्रिकेट मैच देखकर खुश होते हो तो क्या सचिन, गांगुली, सहवाग, कोहली आदि से मलाई मिलती है? सच्चे अम्बेड़करवादी की परख तो बिना पद के ही की जा सकती है. अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग की आदत डालिये. एक दिन की गलती पूरे पाँच साल तक भुगतनी है, ये वोटिंग वाले दिन भुलना नही चाहिए.

(लेखक: एन दिलबाग सिंह; ये लेखक अपने विचार हैं)

Download Suchak App

खबरें अभी और भी हैं...

त्रिविध पावनी वैशाख पूर्णिमा: बौद्ध स्रोतों के आधार पर एक विवेचन

नमोऽस्तु बुद्धाय विशुद्धबोधयेविशुद्धधर्मप्रतिभासबुद्धये।सद्धर्मपुण्योपगतानुबुद्धयेभवाग्रशून्याय विशुद्धबुद्धये॥(बोधिसत्त्वसमुच्चयानाम कुलदेवता, बुद्धस्तोत्र, 1) महामानवों का चरित केवल इतिहास बनकर नहीं रहता, वह चरित सदैव कालजयी होता है। वह चरित प्रत्येक काल...

Samyak Calendar 2026: बहुजन महापुरुषों की जयंती पुण्यतिथि उपोसथ दिन सरकारी छुट्टी ऐतिहासिक तारीखें

Samyak Calendar 2026: कैलेंडर सिर्फ तारीख नही बताते हैं बल्कि इतिहास को भी जीवंत करते हैं. कैलेंडर खोलते ही मन समय में पीछे जाने...

Buddhist Calendar 2026: बुद्ध पूर्णिमा, अष्टमी और उपोसथ दिन व्रत सूची

Buddhist Calendar 2026: कैलेंडर सिर्फ तारीख नही बताते हैं बल्कि इतिहास को भी जीवंत करते हैं. कैलेंडर खोलते ही मन समय में पीछे जाने...

बहुजन अस्मिता: प्रतीकों से वैचारिक क्रांति तक

भारतीय समाज के सांस्कृतिक और वैचारिक धरातल पर वर्तमान में जो मंथन चल रहा है, वह केवल प्रतीकों के बदलाव का विषय नहीं है,...

ब्राह्मणवाद की टीम ‘ए’-कांग्रेस और टीम ‘बी’-भाजपा : मान्यवर श्री कांशीराम साहब का नागपुर संदेश

मान्यवर साहेब, बहुजन समाज की मुक्ति के अद्वितीय योद्धा, सामाजिक परिवर्तन के प्रखर प्रचारक और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक, जिन्होंने अपनी समूची...

बहुजन की ज्वलंत ज्योति: बहनजी का ओज, बसपा का अटल वैभव

जब जगतगुरु संत शिरोमणि गुरु रैदास की जयंती पर गुरु बाबा रैदास की प्रतिमा/चित्र के सम्मुख समाजवादी पार्टी, श्री अखिलेश यादव और इनके उद्दंड...

बहुजन मिशन के योद्धा की अनिवार्य त्रिवेणी: W = T₁ × T₂ × T₃

मिशन (बहुजन समाज पार्टी) के सच्चे कार्यकर्ता की पहचान एक सरल किंतु गहन सूत्र में निहित है—W = T₁ × T₂ × T₃। यह...

चमचा वर्ग: बहुजन आंदोलन का सबसे खतरनाक दुश्मन

बहुजन आंदोलन की राह हमेशा काँटों भरी रही है। कोई भी बड़ा सृजनात्मक और सकारात्मक बदलाव, चाहे वह सामाजिक हो, सांस्कृतिक हो या राजनैतिक,...

संक्रमण काल: तरुणावस्था की अग्निपरीक्षा और बहुजन आंदोलन का अमर-उदय

जीवन एक नाट्यशाला है, जहाँ प्रत्येक पात्र को अपनी भूमिका निभाते हुए एक निश्चित 'संक्रमण काल' से गुजरना ही पड़ता है। यह काल न...

आर्थिक आत्मनिर्भरता: बहुजन आंदोलन की ताकत

बहुजन समाज पार्टी के मिशन में एक छोटी-सी बात बार-बार दोहराई जाती है, लेकिन उसका गहरा अर्थ बहुत कम लोग समझ पाते हैं। जो...

प्रश्नों की हत्या और ईश्वर का भ्रम

मानव-मन की सबसे गहन जिज्ञासा वह नहीं है जो तारों की दूरी मापती है, न ही वह जो समुद्र की गहराई को छूने की...

मान्यवर साहेब की अमर त्रयी: बहुजन समाज, बसपा और बहनजी

मान्यवर श्री कांशीराम साहेब भारतीय राजनीति और सामाजिक परिवर्तन के इतिहास में एक ऐसे दार्शनिक के रूप में उभरे, जिन्होंने दबे-कुचले वर्गों को सशक्त...