मान्यवर साहेब, बहुजन समाज की मुक्ति के अद्वितीय योद्धा, सामाजिक परिवर्तन के प्रखर प्रचारक और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक, जिन्होंने अपनी समूची जीवन-शक्ति ब्राह्मणवादी व्यवस्था, जातिगत असमानता और शोषण के विरुद्ध संघर्ष में लगा दी, 2 फरवरी 1995 को नागपुर में दिए गए अपने ऐतिहासिक भाषण में कांग्रेस पार्टी की सच्चाई, बहुजन समाज की गलत रणनीति तथा सामाजिक परिवर्तन की गहन आवश्यकता को बड़े ही स्पष्ट, तीखे, तर्कसंगत और भावुक शब्दों में उजागर किया। इस भाषण में उन्होंने बहुजन समाज के उन कार्यकर्ताओं और नेताओं को सीधा संबोधित किया जो बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा को मानते हुए भी व्यक्तिगत स्वार्थवश कांग्रेस जैसी ब्राह्मणवादी पार्टी के पीछे खड़े हो जाते थे।
“यदि कांग्रेस के पीछे बाबासाहेब को मानने वाले लोग खड़े हो जाते हैं तो कांग्रेस मजबूत होती है। ये बाबासाहेब को मानने वाले लोग कांग्रेस के पीछे इसलिए खड़े होते हैं क्योंकि इनको लगता है कि कांग्रेसी मजबूत पार्टी है, रिपब्लिकन पार्टी, जो कि बाबा साहेब की पार्टी है, उसे कमजोर पार्टी मानते हैं। इसलिए यह लोग कमजोर पार्टी को छोड़ करके कांग्रेस के पीछे खड़े हो गए, इससे कांग्रेसी और मजबूत हो गई। हमारा यह मानना है कि बहुजन समाज जिसके साथ खड़ा होगा वह उतना ही मजबूत हो जाएगा और यदि बहुजन समाज उसको छोड़ देगा तो वह उतना ही कमजोर हो जाएगा। कांग्रेस पार्टी को कमजोर करना अंबेडकरवादी लोगों का काम होना चाहिए। ऐसा करने के लिए अपने लोगों को चाहिए कि वह कांग्रेस के पीछे से हटे और इससे कांग्रेस कमजोर होगी। लेकिन अपने लोगों को कांग्रेस से पीछे हटाने की जिनकी जिम्मेदारी थी वह लोग खुद कांग्रेस के पीछे जाकर खड़े हो गए। अपनी लालच अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए वे लोग कांग्रेस के पीछे खड़े हो गए। जब मैंने उन लोगों से सवाल किया कि आप लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं तो उन लोगों ने जवाब दिया कि फूले-शाहू-बाबासाहेब का नाम ले करके एमपी और एमएलए नहीं बना जा सकता है। इन लोगों का यह भी कहना था कि यदि हम एमपी और एमएलए नहीं बनते हैं तो हमारा समाज खुद हमारी कदर नहीं करता है। इसलिए हमारा मानना यह था कि सबसे पहले समाज को बदलना जरूरी है। लेकिन समाज को बदलेगा कौन? यदि हम लोग खुद ही कांग्रेस के पीछे, ब्राह्मणवाद के पीछे जाकर खड़े हो जाएंगे तो वह पार्टियां और शक्तिशाली बन जाएंगे। यह सब कुछ देख समझकर फिर मैं उत्तर भारत की तरफ गया और मैं उत्तर भारत के लोगों से जा करके कहा। उत्तर भारत के जिन क्षेत्रों में लोग बाबा साहेब को जानते थे मैं उन क्षेत्रों से तुरंत गाड़ी पकड़ कर दूसरे क्षेत्र में चला जाता था जहां पर लोग बाबासाहेब को नहीं जानते थे ,और वहां जाकर के हमने वहां पर बाबा साहेब के बारे में लोगों को जागरूक किया।”
(मान्यवर श्री कांशीराम साहेब, नागपुर, 2 फरवरी 1995)
मान्यवर साहेब ने कहा कि यदि कांग्रेस के पीछे बाबासाहेब को मानने वाले लोग खड़े हो जाते हैं तो कांग्रेस मजबूत होती है। ये बाबासाहेब को मानने वाले लोग कांग्रेस के पीछे इसलिए खड़े होते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कांग्रेस एक मजबूत और स्थापित पार्टी है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी, जो कि बाबासाहेब की विचारधारा पर आधारित है, उसे वे कमजोर पार्टी समझते हैं। परिणामस्वरूप ये लोग अपनी मूल विचारधारा वाली कमजोर पार्टी को छोड़कर कांग्रेस के पीछे खड़े हो गए, जिससे कांग्रेस और अधिक शक्तिशाली तथा मजबूत हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा यह अटल मानना है कि बहुजन समाज जिसके साथ खड़ा होगा, वह उतना ही मजबूत हो जाएगा और यदि बहुजन समाज किसी दल को छोड़ देगा तो वह उतना ही कमजोर पड़ जाएगा। इसलिए कांग्रेस पार्टी को कमजोर करना हर सच्चे अंबेडकरवादी कार्यकर्ता का प्रमुख दायित्व होना चाहिए।
ऐसा करने के लिए बहुजन समाज के लोगों को चाहिए कि वे कांग्रेस के पीछे से हट जाएं, जिससे कांग्रेस स्वतः ही कमजोर हो जाएगी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, अपने लोगों को कांग्रेस से हटाने की जिनकी जिम्मेदारी थी, वे लोग स्वयं कांग्रेस के पीछे जाकर खड़े हो गए। अपनी व्यक्तिगत लालच, सत्ता की भूख, पद की चाहत और स्वार्थ की पूर्ति के लिए वे कांग्रेस के साथ जुड़ गए। जब मान्यवर साहेब ने उनसे सवाल किया कि आप लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो उन्होंने सरल लेकिन दुखद जवाब दिया कि फूले-शाहू-बाबासाहेब का नाम लेकर एमपी और एमएलए नहीं बना जा सकता। इन लोगों का यह भी तर्क था कि यदि हम संसद या विधानसभा के सदस्य नहीं बनते हैं तो हमारा समाज खुद हमारी कदर नहीं करता है। मान्यवर साहेब ने इस मानसिकता की कड़ी आलोचना की और कहा कि इसलिए हमारा मानना यह है कि सबसे पहले समाज को बदलना जरूरी है। लेकिन सवाल यह उठता है कि समाज को बदलेगा कौन? यदि हम लोग खुद ही कांग्रेस के पीछे, ब्राह्मणवाद के पीछे जाकर खड़े हो जाएंगे तो वे पार्टियां और अधिक शक्तिशाली बन जाएंगी तथा बहुजन समाज की मुक्ति और दूर चली जाएगी।
“इस देश में जो ब्राह्मणवाद को टिकाए रखा गया है, और गैर बराबरी को टिकाए रखा गया है, इसमें कांग्रेस का बहुत बड़ा हाथ है।”
(मान्यवर श्री कांशीराम साहेब, नागपुर, 2 फरवरी 1995)
यह सब कुछ देख-समझकर मान्यवर साहेब ने उत्तर भारत की ओर अपना रुख किया। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत के जिन क्षेत्रों में लोग बाबासाहेब को जानते थे, वहां से तुरंत गाड़ी पकड़कर वे दूसरे उन क्षेत्रों में चले जाते थे जहां लोग बाबासाहेब को बिल्कुल नहीं जानते थे। वहां जाकर उन्होंने बाबा साहेब की विचारधारा, उनके जीवन-संघर्ष, सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांतों तथा बहुजन समाज की मुक्ति के रास्ते के बारे में लोगों को विस्तार से जागरूक किया। यह उनका निरंतर, थकानरहित प्रयास था कि बहुजन समाज अपनी असली ताकत को पहचाने, अपनी एकता को मजबूत बनाए और ब्राह्मणवादी दलों के चंगुल से मुक्त होकर स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति का निर्माण करे। उन्होंने ‘चमचा युग’ की अवधारणा को भी इन संदर्भों में बार-बार दोहराया, जिसमें उन्होंने उन दलित-बहुजन नेताओं को ‘चमचा’ कहा जो ऊपरी जातियों की पार्टियों में जाकर केवल नाममात्र की प्रतिनिधित्व के लिए अपनी असली लड़ाई छोड़ देते थे।
“कांग्रेस ने गांधी जी की देख-रेख में ब्राह्मणवाद को टिकाए रखने के लिए जितना बड़ा काम किया है, उसका ज्ञान मुझे बाबा साहेब द्वारा लिखी ‘जाति का उन्मूलन’ और ‘कांग्रेस और गांधी ने भारत की अछूतों के लिए क्या किया है’, यह दो किताबें पढ़ने से मुझे बड़े पैमाने पर इस बात का एहसास हुआ कि कांग्रेस ब्राह्मणवाद की ‘ए’ टीम है और भाजपा ब्राह्मणवाद की ‘बी’ टीम हैं।”
(मान्यवर श्री कांशीराम साहेब, नागपुर, 2 फरवरी 1995)
मान्यवर साहेब ने कांग्रेस की भूमिका को और भी गहराई तथा ऐतिहासिक संदर्भों से उजागर करते हुए कहा कि इस देश में जो ब्राह्मणवाद को टिकाए रखा गया है और गैर-बराबरी की व्यवस्था को सदियों से मजबूत किया गया है, इसमें कांग्रेस का बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने गांधीजी और कांग्रेस की नीतियों को बाबासाहेब की दो ऐतिहासिक पुस्तकों के संदर्भ में समझाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने गांधी जी की देख-रेख में ब्राह्मणवाद को टिकाए रखने के लिए जितना बड़ा काम किया है, उसका ज्ञान मुझे बाबा साहेब द्वारा लिखित ‘जाति का उन्मूलन’ (Annihilation of Caste) और ‘कांग्रेस और गांधी ने भारत की अछूतों के लिए क्या किया है’ (What Congress and Gandhi Have Done to the Untouchables) इन दो किताबों को पढ़ने से बड़े पैमाने पर हुआ। इन पुस्तकों के गहन अध्ययन से मुझे पूर्ण एहसास हुआ कि कांग्रेस ब्राह्मणवाद की ‘ए’ टीम है और भाजपा ब्राह्मणवाद की ‘बी’ टीम है। दोनों ही पार्टियां अंततः ब्राह्मणवादी व्यवस्था और सामाजिक असमानता को बनाए रखने में सहायक हैं, भले ही उनके बाहरी तरीके और रणनीतियां अलग-अलग दिखाई दें।
यह भाषण मात्र एक साधारण राजनीतिक समीक्षा या चुनावी भाषण नहीं था, बल्कि बहुजन समाज के लिए एक गहन चेतावनी, रणनीतिक दिशा-निर्देश और दीर्घकालिक प्रेरणा का स्रोत था। मान्यवर श्री कांशीराम साहेब ने बार-बार जोर दिया कि सत्ता की छोटी-मोटी लालच में अपनी मूल अंबेडकरवादी विचारधारा को छोड़कर मजबूत दिखने वाली ब्राह्मणवादी पार्टियों के पीछे खड़े होने से समाज की सच्ची मुक्ति कभी नहीं हो सकती, बल्कि ब्राह्मणवाद और गैर-बराबरी की जड़ें और गहरी तथा मजबूत होती जाती हैं। उन्होंने बहुजन समाज को सिखाया कि सच्ची क्रांति तब तक संभव नहीं जब तक बहुजन समाज अपनी ताकत को पूर्ण रूप से पहचानकर बाबासाहेब, ज्योतिबा फुले और शाहूजी महाराज की विचारधारा पर अडिग खड़ा न हो जाए, अपनी स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति का निर्माण न करे और ब्राह्मणवादी दलों पर निर्भरता पूरी तरह छोड़ न दे।
आज, जब बहुजन समाज विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बंटा हुआ है, सत्ता की छोटी-मोटी भागीदारी या पद की लालच में अपनी एकता और विचारधारा को खो रहा है, तथा कांग्रेस-भाजपा जैसी पार्टियां बार-बार बहुजन नेताओं के नाम का इस्तेमाल कर रही हैं, मान्यवर साहेब का यह नागपुर भाषण और भी अधिक प्रासंगिक तथा समयोचित हो उठा है। उन्होंने न केवल ब्राह्मणवाद की सच्चाई को बेनकाब किया, बल्कि बहुजन समाज को आत्मनिर्भर, स्वावलंबी, जागरूक और संगठित बनाने का स्पष्ट, व्यावहारिक मार्ग भी दिखाया। उनका जीवन, उनका संघर्ष और उनका यह संदेश हमें बार-बार याद दिलाता है कि सामाजिक परिवर्तन और समानता की लड़ाई व्यक्तिगत स्वार्थ, पदलोलुपता और सत्ता की क्षणिक भूख से कहीं ऊपर है। बहुजन समाज को अपनी एकता, जागरूकता और अटूट विश्वास के बल पर ही अपनी मुक्ति का रास्ता खुद तय करना होगा, क्योंकि इतिहास साक्षी है कि जो समाज अपनी असली ताकत पर भरोसा करता है और ब्राह्मणवादी चंगुल से मुक्त होता है, वही अंततः विजयी होता है। मान्यवर साहेब का यह अमर संदेश आज भी हर सच्चे अंबेडकरवादी और बहुजन कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा का अनंत स्रोत बना हुआ है तथा आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक क्रांति की राह दिखाता रहेगा।


