ओपिनियन: अपने सिद्धांतों एवं शर्तों पर अडिग बसपा

बसपा मात्र एक राजनैतिक पार्टी नही, बल्कि एक आंदोलन है, एक मिशन है। मंडल मशीहा मान्यवर साहेब जी द्वारा बसपा की स्थापना ही एक मिशन के रूप मे की गई थी जिसकी बागडोर बहनजी ने बखूबी संभाला है। जब भी जनता ने अवसर दिया है बसपा ने मास्टर चाबी (राजनीतिक सत्ता) का इस्तेमाल सामाजिक परिवर्तन के लिए किया है, उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने में सदैव सफल रही है। बसपा की बढ़ती लोकप्रियता, मानवतावादी आचरण, संविधान आधारित लक्ष्य एवं नीति विपक्षी दलो (BJP, SP, RJD, JD(U), CPI, CPI(M), NCP, AITC, AAP, ASP etc.) एवं असामाजिक तत्वों को गवारा नही जिसके चलते बसपा के विरुद्ध षडयंत्र रचना निरंतर जारी रहा है।

इन्द्रा साहेब के शब्दो मे कहें तो ‘बहुजन आन्दोलन (बसपा) के दुश्मनों की एक जमात है। इनको बसपा की स्वतंत्र अस्मिता, स्वतंत्र वैचारिकी, आत्मनिर्भर कार्यशैली पसंद नहीं आती है। इसलिए अपने मलिक के आदेशानुसार ये लोग बसपा को कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा से जोड़कर बदनाम करने की कोशिस करते है।’ इस षड्यंत्र में हमारे समाज के लोग आसानी से फँस भी रहे है जिसकी वजह मिशन और शाहू-फुले-बाबासाहेब-मान्यवर विचारधारा की समझ का न होना है। ‘शोषित वर्गों का हितैषी कौन है?’ को न पहचान पाना, अपने हित का आकलन न कर पाना, राजनैतिक समझ एवं जागरूकता का न होना आदि है।

मिशन के महत्वपूर्ण तथ्य को रेखांकित करते हुए इन्द्रा साहेब लिखते है कि – ‘मिशन तो एक नेता, एक संगठन, एक वैचारिकी, एक झण्डा और एक लक्ष्य पर ही चलता है। बाकी सब हमारी नीति(सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय) और कुछ राजनैतिक क्रमचय-संचय है।’ यदि इस मापदंड पर बसपा को देखें तो शोषित समाज की नेत्री बहनजी ही है जिनके नेतृत्व में बसपा बुद्ध-फुले-शाहू-अम्बेडकर-मान्यवर साहेब की वैचारिकी को आत्मसात करते हुए राष्ट्रनिर्माण (लक्ष्य) हेतु कार्यरत है।

बसपा अपनी स्वतंत्र अस्मिता एवं वैचारिकी के साथ कभी समझौता नही करती जिसका संक्षिप्त परिचय देते हुए, जनता के मध्य प्रचारित नकारात्मक तथ्य को ख़ारिज करते हुए इंद्रा साहेब लिखते है कि ‘कुछ लोग इस बात को लेकर बसपा का विरोध करते हैं कि बसपा ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई लेकिन ये आधा सच है क्योंकि बसपा ने भाजपा संग मिलकर तीन बार सरकार बनाई परन्तु अपनी शर्तों पर। भाजपा के सहयोग से बनी सरकार मे बसपा ने संविधान को उसकी मंशानुरूप लागू किया गया, उत्तर प्रदेश का अम्बेडकराइजेशन शुरू हुआ, बहुजन संस्कृति, बहुजन इतिहास एवं बहुजन नायक-नायिकाओं की सोच, उनके सपनों को इंगित करते भव्य भव्य स्मारक भी बनाये हैं जिनसे बहुजन आन्दोलन के लोग प्रेरणा लेते हैं।”

बसपा आज राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान स्थापित कर चुकी है जिसकी संविधान की मंशानुरूप उसकी नीति “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” मानव हित का परिचायक है। बसपा को सही मायने मे समझने के लिए बहुजन महापुरषों को समझने की जरूरत है क्यूंकि बसपा उन्ही के मानवतावादी विचारधारा पर खड़ी एक राजनैतिक दल बाद में सामाजिक परिवर्तन एवं आर्थिक मुक्ति का आन्दोलन पहले है। इसलिए शोषित वर्गों की जिम्मेदारी बनती है कि मनुवादी एवं पूंजीवादी (कांग्रेस, भाजपा, सपा, राजद, जदयू, टीएमसी, आप आदि) दलों, संगठनों आदि के किसी भी लोकलुभावन झांसे में आने से बचें और अपनी विचारधारा, अपने संगठन (BSP) एवं नेतृत्व (बहनजी) के साथ पूरी ईमानदारी, निष्ठा के साथ अडिग रहें। 

(लेखक: शिक्षा भूमि, विधि छात्र, लखनऊ विश्वविद्यालय)

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