अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण और मुस्लिम

अनुसूचित जाति की मुख्य समस्या जाति आधारित भेदभाव,  छुआछूत एवं जातीय उत्पीड़न है. जाति के कारण इनको शिक्षा, रोजगार आदि से दूर रखा गया. जिससे इनका सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्तर पिछड़ गया.

ये सब गुण एक धर्म विशेष के थे. इस कारण जब संविधान का निर्माण हुआ तो इनके सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए एवं समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए इनको आरक्षण की व्यवस्था की गई. चूँकि ये जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न एवं शोषण हिन्दू धर्म के अंग थे तो इस आरक्षण की व्यवस्था अनुसूचित जाति के उन्ही जातियों को आरक्षण की व्यवस्था की गई जो हिन्दू धर्म का अंग थे.

चूँकि संविधान में बौद्ध और सिक्ख धर्म को हिन्दू धर्म का ही अंग माना गया है तो इनको भी बाद में अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ दे दिया गया.

कुछ लोग सोच रहे होंगे आरक्षण तो आज सभी के लिए हैं तो फिर अनुसूचित जाति के आरक्षण की ही बात क्यों हो रही है?

क्योंकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का आरक्षण एक तो जनसंख्या के अनुसार मिलता है और दूसरा इसमें क्रीमीलेयर नही है. जबकि बाकी सभी आरक्षण कहीं ना कहीं आर्थिक स्तर से जुड़े हुए हैं. इसलिए ये आरक्षण सबको हलवा लगता है. सब इसको खाना चाहते हैं.

आजकल धर्म परिवर्तित मुस्लिम अपने लिए अनुसूचित जाति के आरक्षण की माँग कर रहे हैं. असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसकी माँग करी है जबकि वो खुद अशरफ हैं. मैं अब तक असदुद्दीन ओवैसी को तार्किक बात करने वाला समझता था लेकिन इसके बाद मेरा ये विश्वास कम हो गया.

अनुसूचित जाति-जनजाति की मुख्य समस्या जातीय उत्पीड़न और भेदभाव हैं. इससे तंग आकर ही वो धर्म परिवर्तित करते हैं. धर्म परिवर्तन के बाद ये माना जाना चाहिए कि उनकी समस्या का अंत हो गया है और उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव होना बंद हो गया है.

वैसे भी इस्लाम धर्म में जाति नाम की कोई चीज नहीं होती. अगर जाति होती भी है तो उसके आधार पर भेदभाव कोई नहीं स्वीकार करता. कोई भी इस्लाम का अनुयायी ये नही स्वीकार करता कि इस्लाम के अनुयायी किसी भी इस्लाम के अनुयायी को जाति रंग नस्ल के आधार पर छोटा बड़ा या ऊँचा नीचा मानकर भेदभाव करते हैं.

जब जाति के आधार पर भेदभाव उत्पीड़न शोषण नही तो फिर अनुसूचित जाति का आरक्षण क्यों? अगर आपको अनुसूचित जाति वाला आरक्षण चाहिए तो उसके लिए अलग से आंदोलन कीजिए. शायद आपको अनुसूचित जाति का भी समर्थन मिल जाये. लेकिन अगर सिर्फ अनुसूचित जातियों के आरक्षण को निशाने पर लेने के लिए अनुसूचित जातियों वाला आरक्षण मांगोगे तो आखिर तक अकेले ही खड़े रहोगे.

(लेखक: सूधीर कुमार जाटव; यह लेखक के अपने विचार हैं)

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