आन्दोलन के लिए समय व ऊर्जा का सदुपयोग जरूरी

आज बहुजन समाज का एक बड़ा तबका सोशल मिडिया के माध्यम से अपनी बात को रखते हुए सरकार, सामाजिक व्यवस्था और मौजूदा वातावरण पर टिपण्णी कर रहा हैं, अपनी राय रख रहा हैं। ये बहुजन समाज के लिए बड़ा ही सुखद संकेत हैं। बहुजन युवाओं की भागीदारी, स्वतंत्र टिप्पणी और उनकी प्रखर आवाज के मद्देनज़र ही सोशल मिडिया को बहुजन मीडिया (Bahujan Media) कहा जाने लगा हैं। इस सोशल मीडिया को शुरूआती दौर में काफी सराहा गया। परन्तु, जब बहुजनों ने अपनी दस्तक को सोशल मीडिया पर स्थापित कर अपनी मुद्दों को आगे बढ़ने का कार्य शुरू ही किया तो सत्ता के अलग-अलग क्षेत्रों में काबिज़ बहुजन विरोधियों ने सोशल मीडिया के खिलाफ दुष्प्रचार शुरू कर दिया। नतीजा, सोशल मिडिया पर तमाम तरह की पाबंदियां।

फिलहाल, बहुजन समाज के युवाओं को अपने मुद्दों, अपने मिशन, अपने राजनैतिक अस्मिता और अपने राष्ट्रिय नेतृत्व से भटकाने के लिए प्रतिद्वंदियों द्वारा लगातार भटकाऊ कृत्य किये जा रहें हैं, बयान दिए जा रहे हैं। दुखद हैं कि बहुजन युवा अपने शोषक वर्ग के इस भटकाऊ चाल में गिरफ्तार होकर प्रतिक्रियावादी बन चुका हैं। नतीजा, बहुजन युवाओं की ऊर्जा बहुजन आन्दोलन के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा हैं जबकि ये बहुजन युवा ऊर्जा बहुजन आन्दोलन के लिए अति महत्वपूर्ण हैं। हो सकता हैं कि आप हमसे सहमत नहीं हो लेकिन हमारा स्पष्ट मानना हैं कि हमारे अधिकतर बहुजन युवा व अन्य लोग सोशल मीडया पर अपना कीमती समय बर्बाद कर रहें हैं। इनके ऐसे पोस्ट्स, जो प्रतिद्वंदी नेताओं व उनके दलों आदि के सकारात्मक या नकारात्मक प्रचार में लिखे गए होते हैं, से बहुजन समाज और आंदोलन को कोई फायदा नहीं होने वाला है।

आप सबको ज्ञान होना चाहिए कि हमारे लोग दिल्ली के स्कूल का प्रचार करें या फिर तानाशाह की कमियाँ गिनाइये, इन सब की चर्चा के केंद्र में आपका शोषक ही रहता हैं। इस प्रकार से आप ना चाहते हुए भी अपने शोषक वर्ग का ही प्रचार करते हैं। परिणामस्वरुप, आपकी हर चर्चा और लेख में, आपका शोषक केंद्र में होता हैं और आप, आपका आन्दोलन और आपका नेतृत्व हाशिये पर होता है। क्या कभी सोचा हैं कि ऐसे लेख, कॉमेंट और पोस्ट्स में बहुजन मुद्दे, बहुजन व बहुजन समाज कहाँ हैं? यदि हर चर्चा, हर लेख, यहाँ तक कि दिनचर्या में बहुजन, बहुजन मुद्दे, बहुजन समाज और बहुजन नेतृत्व के बजाय बहुजन शोषक ही रहेगा तो इससे बहुजन के सामाजिक परिवर्तन के बहुजन आन्दोलन को सिर्फ और सिर्फ नुक्सान ही होगा।

ऐसे पोस्ट्स, जिनके केंद्र में सदा बहुजन शोषक ही रहता है, से बहुजन अपने आन्दोलन और अपने नेतृत्व (बसपा और बहनजी) को जानने-समझने के बजाय बहुजन समाज के लोग बहुजन समाज के शोषक वर्ग के ही इर्द-गिर्द घूमते रहेगें। बहुजन समाज के लोगों द्वारा अपने शोषक वर्ग और तानाशाह का नकारात्मक प्रचार करने से बेहतर हैं कि बहुजन अपने बहुजन महानायकों-महनायिकाओं के विचारों को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर उनसे सकल बहुजन समाज को जोड़ने का कार्य करें। ये बहुजन आन्दोलन के कारगर साबित होगा। मान्यवर साहेब की बातों को याद करते हुए विश्वविख्यात समाज विज्ञानी प्रो विवेक कुमार सर कहते हैं कि नकारात्मक प्रचार भी एक प्रचार होता हैं। बहुजन समाज के युवाओं को ये भलीभाँत मालूम है कि तथाकथित मुख्यधारा मीडिया, बहुजन विरोधी सभी राजनैतिक दल, न्यायपालिका में बैठे लोग, सिविल सोसाइटी आदि बहुजन आन्दोलन और उसके एकमात्र राजनैतिक दल बसपा की कमियां खोजकर झूठ, फरेब और दुष्प्रचार करने में पूरी लगन से जुटे हुए हैं। इसलिए बहुजन आन्दोलन के सभी लोगों की ये नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि बहुजन समाज बहुजन वैचारिकी को जन-जन तक पहुंचाकर बहुजन आन्दोलन को आगे बढ़ाते हुए अपनी राजनैतिक अस्मिता बसपा को मजबूत करे।

आपका बहुजन विरोधी, प्रतिद्वंदी लगातार भटकाऊ कॉमेंट, मुद्दे आदि को आपके सामने इसलिए खड़ा करता रहता है ताकि आप उसकी ऐसी हरकतों की प्रतिक्रिया में अपना कीमती समय लगाकर उलझ जायें। उसकी ऐसी सारी हरकतें बहुजन समाज को उन्मादी व प्रतिक्रियात्मक बनाकर सामाजिक परिवर्तन के आन्दोलन से बहुजन समाज के लोगों को दूर करने के लिए किया जा रहा है। इसलिए कभी थाली बजाकर, कभी कोरोना का महोत्सव मनाकर वो गरीबों शोषितों वंचितों का ध्यान बहुजन समाज के मूल मुद्दों से भटकाना चाहता है। ऐसे में बहुजन समाज की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि बहुजन समाज अपने प्रतिद्वंदी के भटकाऊ कृत्यों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय पूरी सिद्धत से अपने मिशन, लक्ष्य, अपनी राष्ट्रिय पार्टी, अपने नेतृत्व से जुड़े रहें। यदि बहुजन समाज को सोशल मीडिया पर कुछ लिखना ही है, शेयर करना ही है तो बहन जी के बारे में, उनकी कार्यशैली और प्रशासन के विषय में लिखिए। बहन जी के कार्यों से बहुजन युवा और अन्य बहुजन आज भी अनजान हैं। ऐसे में बहन जी के कार्यों से बहुजनों को अवगत करने के लिए पोस्ट शेयर कीजिये। बहुजन महानायकों-महनायिकाओं की जीवन संघर्ष, गौरव-गाथाओं आदि के बारे पोस्ट कीजिये। ये बहुत महत्त्वपूर्ण व ध्यान देने योग्य बात हैं कि हमारे लोगों ने जितना प्रतिद्वंदी व बहुजन समाज के शोषक दलों का प्रचार किया हैं यदि उसका 50 फ़ीसदी प्रचार भी बहुजन युवाओं ने बहन जी के लिए किया होता तो आज भारत की फ़ज़ाओं में संविधान व लोकतंत्र की खुशबू के साथ भारत की फ़िज़ा कुछ और होती।

बहुजन समाज बहुजन आंदोलन का वाहक है। इसलिए बहुजन समाज व बहुजन युवा को पूरी इमानदारी व निष्ठा के साथ अपने मुद्दे और अपने दल व नेतृत्व के साथ अडिग रहना चाहिए। अपने प्रतिद्वंदियों का नकारात्मक या सकारात्मक प्रचार करने के बजाय अपने आंदोलन, बाबा साहेब, काशीराम साहेब, और बहन जी के कार्यों को हर बहुजन तक पहुँचाने के पोस्ट व लेख लिखना चाहिए, पोस्ट्स शेयर करना चाहिए। अपनी वैचारिकी को जन-जन तक पहुंचाकर सामाजिक परिवर्तन के बहुजन आन्दोलन को मजबूत करना चाहिए। अपनी राजनैतिक साख को हुकूमत के ऊँचें पायदान तक पहुँचाने व स्थापित करने के लिए पूरी सकारात्मकता के साथ लिखना-पढ़ना, विचार-विमर्श करना ही बहुजनों के समय व ऊर्जा का सोशल मीडिया के संदर्भ में सही इस्तेमाल होगा। याद रहे, कमियाँ गिनाने के लिए पूरा मनुवादी तंत्र मौजूद है। इसलिए बहुजन समाज को अपनी विचारधारा, अपने नायक-नायिकाओं, नेतृत्व (बहनजी) व दल (बसपा) की उपलब्धियों को चर्चा के केन्द्र में लाकर अपने सकारात्मक कृत्यों को जन-जन तक पहुँचाने में अपनी ऊर्जा व समय का सदुपयोग करना चाहिए।


— लेखक —
(इन्द्रा साहेब – ‘A-LEF Series- 1 मान्यवर कांशीराम साहेब संगठन सिद्धांत एवं सूत्र’ और ‘A-LEF Series-2 राष्ट्र निर्माण की ओर (लेख संग्रह) भाग-1′ एवं ‘A-LEF Series-3 भाग-2‘ के लेखक हैं.)


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