क्या तेलंगाना बनेगा बीएसपी के लिए एक मॉडल राज्य?

तेलंगाना: 10 जून, 2022 को बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती जी ने एक ऐतिहासिक और साहसी फैंसला लेते हुए रिटायर्ड अफसर और वर्तमान बीएसपी प्रदेश समन्वयक आर एस प्रवीण जी को तेलंगाना राज्य का प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया. इसकी घोषणा बसपा सासंद रामजी गौतम ने एक बड़े जनसैलाब के बीच हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम में करी.

आर एस प्रवीण कुमार को कुछ महिने पहले ही पार्टी में प्रदेश का चीफ स्टेट कॉर्डिनेटर बनाया गया था. तब उन्होने पार्टी को आधिकारिक तौर पर जॉइन किया था. तब से अब तक प्रवीण जी की लोकप्रियता बढ़ती ही गई है और उन्होने “बहुजन राज यात्रा” का सफल आयोजन करके अपने नेतृत्व क्षमता को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने साबित भी किया. शायद इसी का इनाम उन्हे प्रदेश अध्यक्ष बनाकर दिया गया है.

सवाल आता है कि क्या यह व्यक्तिवाद की तरफ बढ़ता कदम तो नही साबित होगा या फिर तेलंगाना बसपा के लिए देशभर में रोल मॉडल राज्य बनेगा?

बसपा जॉइनिंग से पहले ही कर चुके हैं कमाल

आर एस प्रवीण कुमार एक आईपीएस अधिकारी रहे हैं और उन्होने तेलंगाना सरकार के अंतर्गत चलने वाले सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले स्टुडेंट्स की कायापलट करके खुद को पहले से ही एक नायक के तौर पर साबित किया है. लोग उनके सख्त प्रशासनिक फैंसलों और बाबासाहब के प्रति दिवानगी से प्रेरित होकर उन्हे प्यार से सिंघम कहकर भी पुकारते हैं.

उन्होने अपने ऑफिस में एक बड़ी सारी बाबासाहब की प्रतिमा लगाकर सबको चौंका दिया था. वह खुलकर कहते हैं कि अपनी पहचान को छिपाओं मत इसे अपनी ताकत बनाओं. यह बात उन्होने अपने जनहित में किए गए कार्यों से साबित भी करके दिखाई है. उनकी फेन फॉलोविंग ना सिर्फ दलितों में बल्कि पूरा तेलंगाना उनसे प्रभावित है और हर तरफ उनकी चर्चा होती है.

स्वेरो नाम की संस्था बनाकर वे हजारों स्टुडेंट्स को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेज चुके हैं तो वहीं माउनटेन एवरेस्ट की चढ़ाई, खेल, प्रशासन, राजनीति ऐसे तमाम क्षेत्रों में स्टुडेंट्स को तैयार करके अलग-अलग क्षेत्रों में वंचित तबके से तालुक रखने वाले बच्च पहुँचाएं है.

300 दिन की यात्रा से बंटोरी सुर्खियाँ

तेलंगाना में सत्ता परिवर्तन चाहिए इस विचार को तेलंगाना की जनता के मूड में भरने के लिए आर एस प्रवीण कुमार ने अपनी टीम के साथ 300 दिनों की एक लंबी और गेम चेंजर यात्रा आयोजन का सफल प्लान किया. जिसका लगभग एक तिहाई हिस्सा कवर भी किया जा चुका है. जो अभी तक जारी है.

इस ऐतिहासिक यात्रा के माध्यम से प्रवीण जी तेलंगाना के लोगों की नब्ज पकड़ना चाहते हैं. सोशल मीडिया पर छा रही उनकी तस्वीरों से मालूम चलता है कि उन्हे जनता से कनेक्ट होना अच्छी तरह आता है और मीडिया में सुर्खियां बंटोरना भी वे भलीभांति जानते हैं. इसी कारण आज उत्तर भारत के बसपा समर्थक भी उनकी चर्चा करने से नही थक रहे हैं.

तेलंगाना इसलिए बन सकता है रॉल मॉडल

भारतीय जनता का मानस ही इस तरह विकसित हुआ है कि वो अपनी समस्याओं का हल दूसरों से चाहती है. खासकर मनुवाद की कैद से कुछ हद तक आजाद हुए समाज की यह बड़ी समस्या है. इसलिए, उसे नायकों की जरूरत पड़ती है. ये नायक ही उसकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है.

वैसे भी दो जून की रोटी को तरस्ती जनता मानसिक लड़ाई लड़ने में सक्षम नही हो सकती है. इसलिए, इन लोगों के लिए बाबासाहब, मान्यवर कांशीराम, बहनजी जैसे नायकों की जरूरत पड़ती ही रहेगी. इसी परिपाटी को आगे बढ़ा रहे है तेलंगाना के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आर एस प्रवीण कुमार जी.

उनकी एग्रेसिवनेस, मुद्दों की समझ, अपने लोगों से कनेक्ट होने की शैली उन्हे अन्य बसपा पदाधिकारियों से अलग करती है. पंजाब में कुछ हद तक यह कार्य माननीय जसवीर सिंह गढ़ी जी करते हुए दिखाई पड़ते हैं. इसके अलावा किसी भी राज्य में इस तरह की एग्रेसिवनेस बसपा में कहीं भी नही दिखाई पड़ती है.

राष्ट्रीय स्त्तर पर तो इसका अब सूखा सा दिखाई देता है. बहनजी के अलावा एक भी दमदार नेता दूर-दूर तक नजर नही आता है. युवा दिलों की धड़कन कहे जा रहे वर्तमान नेशनल कॉर्डिनेटर को खूंटे से बांधना भी इस समय आत्मघाती साबित हो रहा है. उन्हे अब खुलकर फ्रंट-फुट पर खेलने की आजादी लेकर ही मैदान में आना होगा. क्योकि, बहनजी के बाद बसपा समर्थक उन्हे ही तवज्जों दे रहे हैं. वैसे भी बहनजी का भतीजा होने का फायदा उन्हे अपने समाज से जुड़ने में एक कारगार हथियार साबित हो सकता है. बशर्ते इस दोधारी हथियार को चलाने का प्रशिक्षण उन्होने लिया हो.

(लेखक: जी पी गौतम; ये लेखक के निजी विचार हैं)

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