कौन सी BAMCEF? मान्यवर साहेब की असली – या ब्राह्मणवादी वित्त पोषित नकली?

आज बहुजन संगठनों की महामारी में, जब बहुजन समाज के कानों में ‘बामसेफ’ का नाम गूँजता है, तो हृदय में एक अनिवार्य प्रश्न उदित होता है—कौन-सी बामसेफ?

क्या वह मूल बामसेफ, जिसकी नींव मान्यवर श्री कांशीराम साहेब ने स्वयं 1978 में रखी थी—‘ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटीज एम्प्लॉयीज़ फेडरेशन’ के रूप में? वह संगठन, जो सरकारी सेवा में संलग्न पिछड़े, दलित, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक कर्मचारियों का था; जिसका एकमात्र उद्देश्य था—शिक्षित बहुजन को जागृत करना, उनके बुद्धि, कौशल एवं धन को बहुजन हित में समर्पित करना, तथा समतामूलक समाज की स्थापना हेतु एकजुट कर संघर्ष करना। मान्यवर साहेब ने इसे कभी राजनीतिक मंच नहीं बनाया; यह गैर-राजनीतिक, गैर-धार्मिक, गैर-अनशनात्मक कैडर-आधारित संगठन था, जिसने बहुजन समाज को राजनीतिक शक्ति प्राप्ति के लिए सशक्त आधार प्रदान किया।

इसके बाद 1980 के शुरुआती दशक में उन्होंने डीएस-4 (दलित शोषित समाज संघर्ष समिति) का गठन किया, और 1984 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थापना की—जो बहुजन जागरण का चरम बिंदु बनी। किंतु 1986 के आसपास बामसेफ के ही स्वार्थी व महत्वाकांक्षी लोगों की वजह से बामसेफ में विभाजन हुआ। मान्यवर साहेब ने स्पष्ट घोषणा की—अब वे केवल बसपा के लिए कार्य करेंगे। उनके साथ चलने वाले अधिकांश सच्चे सिपाही बसपा में शामिल हो गए या फिर बसपा की बामसेफ में शामिल हो गए। परंतु कुछ लोग, विशेषकर महाराष्ट्र के समूह से, अलग हो गए और बामसेफ को स्वतंत्र गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में पंजीकृत करा लिया। हालाँकि समय के साथ यह पंजीकृत बामसेफ भी अनेक गुटों में विखंडित हो गई।

यह विभाजन मात्र व्यक्तिगत मतभेद नहीं था; यह कांग्रेस एवं राजीव गांधी द्वारा रची गई एक सुनियोजित साजिश का परिणाम था, जिसका लक्ष्य बसपा की उभरती शक्ति को कमजोर करना था। पंजीकृत बामसेफ और उससे जुड़े विभिन्न गुट—बहुजन सेनाएँ, आर्मियाँ, मुक्ति पार्टियाँ, तथाकथित बहुजन दल, पार्टियां व संगठन—सभी ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मान्यवर साहेब, बहन मायावती जी एवं बसपा के विरोधियों को सहारा दिया। महाराष्ट्र में इसने शरद पवार के समक्ष सिर झुकाया, तो उत्तर प्रदेश में दलित-बहुजन विरोधी समाजवादी पार्टी जैसी जातिवादी शक्तियों को चुनावी समर्थन देकर उनका चुनाव प्रचार तक किया।

ये संगठन निरंतर बहुजन समाज को उसके मूल मुद्दों—आत्मनिर्भर राजनीति, स्वतंत्र वैचारिकी, बहुजन एजेण्डे व समतामूलक समाज सृजन—से विमुख करते रहे। कभी भाजपा के पक्ष में, कभी कांग्रेस के, कभी सपा-एनसीपी के समर्थन में—वे बहुजन को नकारात्मक विवादों, व्यर्थ कलह एवं विभाजनकारी बहसों में उलझाए रखते हैं। इस प्रकार वे ब्राह्मणवादी व्यवस्था के षड्यंत्रों में सक्रिय सहभागी बने रहते हैं, बहुजन एकता के मार्ग में काँटे बिछाते हुए। यह सब एक गहन सुनियोजित चाल है, जिसका उद्देश्य बहुजन की स्वतंत्र राजनीतिक चेतना को कुंठित करना, उसके स्वाभिमान को आहत करना, तथा अंततः अप्रत्यक्ष तौर पर मनुवादी व्यवस्था की रक्षा करना है।

आज मूल प्रश्न यह है—

एक ओर मान्यवर साहेब की बामसेफ (बसपा)—जो बसपा का ही अविभाज्य अंग थी, बहुजन की राजनीतिक पहचान एवं संघर्ष का प्रतीक बनी। बसपा उसी का अगला स्वाभाविक कदम है। बहन मायावती जी के नेतृत्व में बसपा आज देश की प्रमुख बहुजन शक्ति है, जिसने उत्तर प्रदेश में बार-बार सत्ता हासिल कर बहुजन को सत्ता का स्वाद चखाया, उन्हें सशक्त बनाया।

दूसरी ओर पंजीकृत बामसेफ—जिसने गैर-राजनीतिक होने का दावा करते हुए अलग पथ चुना। मान्यवर साहेब ने स्वयं स्पष्ट किया था कि यह ब्राह्मणवादी फंडिंग एवं साजिशों से प्रभावित होकर बसपा एवं बहुजन एकता को क्षीण करने का कार्य करती है। विभिन्न गुट बनाकर यह बहुजन सामर्थ्य व वोट को बाँटने का प्रयास करती है।

बहुजन-विरोधी शक्तियाँ भलीभाँति जानती हैं कि बहुजन की असली ताकत उसकी एकजुट वोट-शक्ति में निहित है। अतः वे बसपा की नकल कर, बहुजन नाम से संगठन खड़े कर भ्रम फैलाते हैं। किंतु सत्य यही है—मान्यवर साहेब एवं बहनजी के अथक परिश्रम से जो राजनीतिक पहचान उभरी, वह बसपा है। असली बामसेफ का अर्थ वही विचारधारा है, जो बसपा में जीवंत है।

अब निर्णय आपका है—

क्या आप मान्यवर श्री कांशीराम साहेब की बामसेफ—अर्थात् बसपा एवं बहुजन एकता—के साथ खड़े हैं?

या उन पंजीकृत बामसेफ एवं उनके गुटों के साथ, जो विभाजन, आरोप-प्रत्यारोप एवं बहुजन-विरोधी खेल में लिप्त हैं?

बहुजन-विरोधी ताकतें ब्राह्मणवादी फंड से पोषित हो सकती हैं, किंतु असली संघर्ष वही है जो जातीय गुलामी से मुक्ति की पुकार करता है, सत्ता में हिस्सेदारी हासिल करता है, तथा आत्मनिर्भर बहुजन आंदोलन—बसपा—के माध्यम से समतामूलक समाज की निरंतर साधना करता है।

स्मरण रहे—बहुजन हितैषी वही है, जो बहुजन को सशक्त बनाए, न कि बाँटे।
बहुजन एकता ही मुक्ति का मार्ग है—और वह मार्ग बसपा में ही संनादति है।


— लेखक —
(इन्द्रा साहेब – ‘A-LEF Series- 1 मान्यवर कांशीराम साहेब संगठन सिद्धांत एवं सूत्र’ और ‘A-LEF Series-2 राष्ट्र निर्माण की ओर (लेख संग्रह) भाग-1′ एवं ‘A-LEF Series-3 भाग-2‘ के लेखक हैं.)


Buy Now LEF Book by Indra Saheb
Download Suchak App

खबरें अभी और भी हैं...

ब्राह्मणवाद की टीम ‘ए’-कांग्रेस और टीम ‘बी’-भाजपा : मान्यवर श्री कांशीराम साहब का नागपुर संदेश

मान्यवर साहेब, बहुजन समाज की मुक्ति के अद्वितीय योद्धा, सामाजिक परिवर्तन के प्रखर प्रचारक और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक, जिन्होंने अपनी समूची...

बहुजन की ज्वलंत ज्योति: बहनजी का ओज, बसपा का अटल वैभव

जब जगतगुरु संत शिरोमणि गुरु रैदास की जयंती पर गुरु बाबा रैदास की प्रतिमा/चित्र के सम्मुख समाजवादी पार्टी, श्री अखिलेश यादव और इनके उद्दंड...

बहुजन मिशन के योद्धा की अनिवार्य त्रिवेणी: W = T₁ × T₂ × T₃

मिशन (बहुजन समाज पार्टी) के सच्चे कार्यकर्ता की पहचान एक सरल किंतु गहन सूत्र में निहित है—W = T₁ × T₂ × T₃। यह...

चमचा वर्ग: बहुजन आंदोलन का सबसे खतरनाक दुश्मन

बहुजन आंदोलन की राह हमेशा काँटों भरी रही है। कोई भी बड़ा सृजनात्मक और सकारात्मक बदलाव, चाहे वह सामाजिक हो, सांस्कृतिक हो या राजनैतिक,...

संक्रमण काल: तरुणावस्था की अग्निपरीक्षा और बहुजन आंदोलन का अमर-उदय

जीवन एक नाट्यशाला है, जहाँ प्रत्येक पात्र को अपनी भूमिका निभाते हुए एक निश्चित 'संक्रमण काल' से गुजरना ही पड़ता है। यह काल न...

आर्थिक आत्मनिर्भरता: बहुजन आंदोलन की ताकत

बहुजन समाज पार्टी के मिशन में एक छोटी-सी बात बार-बार दोहराई जाती है, लेकिन उसका गहरा अर्थ बहुत कम लोग समझ पाते हैं। जो...

प्रश्नों की हत्या और ईश्वर का भ्रम

मानव-मन की सबसे गहन जिज्ञासा वह नहीं है जो तारों की दूरी मापती है, न ही वह जो समुद्र की गहराई को छूने की...

मान्यवर साहेब की अमर त्रयी: बहुजन समाज, बसपा और बहनजी

मान्यवर श्री कांशीराम साहेब भारतीय राजनीति और सामाजिक परिवर्तन के इतिहास में एक ऐसे दार्शनिक के रूप में उभरे, जिन्होंने दबे-कुचले वर्गों को सशक्त...

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’: बहन मायावती जी का दर्शन

भारतीय राजनीति और समाज सुधार के इतिहास में कुछेक व्यक्तित्व ऐसे हुए हैं जिन्होंने न केवल अपने ऐतिहासिक कार्यों एवं विचारों से समाज को...

बसपा की असली जीत—शोषितों का जगा मनोबल है

भारतीय राजनीति के विशाल मंच पर जहाँ पार्टियाँ सत्ता की चकाचौंध में रंग-बिरंगे नृत्य करती दिखती हैं, वहाँ कांग्रेस का वंशानुगत विरासतवाद, भाजपा का...

पराये धन के सहारे नहीं, बहुजन के सहारे चलती है बसपा – बहनजी का अटल स्वाभिमान

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और उसके संस्थापक-मान्यवर श्री कांशीराम साहेब जी तथा बहनजी द्वारा स्थापित बहुजन आंदोलन की मूल विचारधारा (आम्बेडकरवाद) आत्मनिर्भरता, मान-सम्मान, स्वाभिमान...

न बिकने वाला बहुजन: मान्यवर साहेब का अमर मंत्र, बसपा का अटल संकल्प

बहुजन आन्दोलन के महान प्रणेता, मान्यवर श्री कांशीराम साहेब का वह उद्घोष आज भी बहुजन हृदय में गूँजता है—एक ऐसा संदेश जो न केवल...