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मत-विमत

पड़ताल: ‘बसपा’ के खिलाफ ही दुष्प्रचार क्यों?

भारत में तमाम राजनीतिक दल सक्रिय हैं। कुछ मजबूती से सत्ता में तो कुछ विपक्ष में क़ायम हैं। सबके अपने-अपने मुद्दे और निहित उद्देश्य...

ग्रोक का अनफ़िल्टर्ड सच और भारत में सूचना का भविष्य

पिछले दो दिनों में, एआई की एक और नई शक्ति सामने आई है. सिर्फ़ दो महीने पहले, यह विचार कि ऐसा कुछ हो सकता...

बहुजन आंदोलन में उतराधिकारी की जरूरत

जब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का उल्लेख होता है, तो विरोधियों की उपस्थिति तो स्वाभाविक है ही, किंतु बहुजन समाज के स्वघोषित चिंतक, कार्यकर्ता...

हिन्दू-मुस्लिम नैरेटिव – राष्ट्र निर्माण में बाधक

"हिंदुत्व का कथित संकट और बहुजन समाज की चुनौती" पिछले कुछ दशकों से भारत में एक कथानक गढ़ा गया है कि हिंदुत्व संकट में है।...

चुनाव की आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति – The Proportional Representation Method of Election

भारत एक ऐसा देश है, जहाँ विविधता अपने पूर्ण वैभव में प्रस्फुरित होती है। यहाँ असंख्य भाषाएँ, धर्म और हजारों जातियाँ एक अनुपम सांस्कृतिक...

राम की ख़ोज

भारतीय संस्कृति में दो राम: निर्गुण बनाम सगुण का दार्शनिक और सामाजिक विश्लेषण भारतीय संस्कृति में ‘राम’ के दो अलग-अलग स्वरूपों का उल्लेख मिलता है,...

राम और श्रीराम में फर्क है

राम और श्रीराम : निर्गुण बनाम सगुण का दार्शनिक और सामाजिक विश्लेषण भारतीय संस्कृति और परंपरा में ‘राम’ शब्द दो अलग-अलग संदर्भों में प्रकट होता...

Opinion: क्या बौद्धों को दीपावली या दीपदानोत्सव मनाना चाहिए?

भारत देश में जब भी कोई प्रमुख पर्व आता हैं तो उसे मानने और ना मानने के पक्ष में सोशल मीडिया से लेकर चाय...

साहेब बनना आसान, बहनजी बनना मुश्किल

भारतीय राजनीति में गला काट प्रतियोगिता, जानलेवा संघर्ष, षड्यंत्र, और चालबाजियों का बोलबाला है। यहाँ अनगिनत प्रतिद्वंद्वी और दुश्मन हैं—अपने भी, पराये भी, अंदर...

शांति स्वरुप बौद्ध: साहित्य और संस्कृति की शिखर शख्सियत

Shanti Swaroop Bauddh: इतिहास की अपनी एक निश्चित दिशा और गति होती है, जिसमें सामान्यतः व्यक्ति विशेष का स्थान गौण होता है। लेकिन कुछ...

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