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मत-विमत

दलित राजनीति में ओबीसी हैं फिर ओबीसी राजनीति से दलित गायब क्यों?

दलित एक शब्द है ,जिससे एक पहचान बनती है. यह पहचान जाति की पहचान नहीं है. यह पहचान समाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है....

ओपिनियन: अगर नेहरु की जगह अंबेडकर पीएम होते तो हालात कुछ और होते

नेहरु की जगह सरदार पटेल पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते. ये सवाल नेहरु या कांग्रेस से नाराज हर नेता या...

समतावादी नायकों, तिथियों, पर्वों, विचारों को बढ़ावा दिया जाए

शिक्षक दिवस : समतावादी संस्कृति का प्रश्न और दिशा आज प्रभात में जब सोशल मीडिया पर दृष्टि डाली, तो ज्योतिबा फुले, माता सावित्रीबाई फुले, बाबासाहेब...

एन दिलबाग सिंह का कॉलम: दलित राजनीति की असली मलाई

दलित समाज की राजनीति को समझना इतना आसान नही है क्योंकि ये समाज मानसिक गुलामी से बाहर आने को अभी तक तैयार नही दिखता....

एन दिलबाग सिंह का कॉलम: आसमान की तरफ उँगली

बचपन से बाबासाहेब अम्बेड़कर की बहुत सी फोटो देखी हैं, उनमे से शायद एक भी फोटो ऐसी नही मिलेगी जिसमे वो आसमान की तरफ...

अनकही: दीनाभाना और महारों की कहानी मान्यवर साहेब की जुबानी

Ordinance Factory में 1957 से दो छुटियाँ,  एक बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर जी के जन्म दिन की तथा दूसरी बुद्धा जयंती के नाम से मनाई...

Collegium System: कोलेजीयम सिस्टम भारतीय न्याय प्रणाली पर ग्रहण?

भारत में अबतक कुल 49 चीफ़ जस्टिस हुये लेकिन खास बात यह कि इन चीफ़ जस्टिस के साथ-साथ तमाम हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के जज...

ब्रहम्ण वर्चस्व को चुनौती, गढ़े गए ईश्वर की संख्या के समानुपाती है

देवता, जाति और ब्राह्मणवादी व्यवस्था : एक समीक्षात्मक विश्लेषण जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति प्रो. संतिष्ट्री धूलिपुडी पंडित ने हाल ही में डॉ. बी.आर....

एन दिलबाग सिंह का कॉलम: जातिय शोषण और क्रांति

संसार में जहाँ-जहाँ भी किसी का शोषण हुआ है वहाँ शोषितों द्वारा एक क्रांन्ति हुई है. लेकिन, भारत में सदियों बाद भी जातियों में...

एन दिलबाग सिंह का कॉलम: नफरत जाति से या आरक्षण से

बहुत से लोग जो खुद को ज्यादा ही समझदार और महाज्ञानी मानते हैं, उनका मानना है कि जातिवाद की नफरत आरक्षण के कारण से...

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