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समाज संस्कृति

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’: बहन मायावती जी का दर्शन

भारतीय राजनीति और समाज सुधार के इतिहास में कुछेक व्यक्तित्व ऐसे हुए हैं जिन्होंने न केवल अपने ऐतिहासिक कार्यों एवं विचारों से समाज को...

बसपा की असली जीत—शोषितों का जगा मनोबल है

भारतीय राजनीति के विशाल मंच पर जहाँ पार्टियाँ सत्ता की चकाचौंध में रंग-बिरंगे नृत्य करती दिखती हैं, वहाँ कांग्रेस का वंशानुगत विरासतवाद, भाजपा का...

पराये धन के सहारे नहीं, बहुजन के सहारे चलती है बसपा – बहनजी का अटल स्वाभिमान

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और उसके संस्थापक-मान्यवर श्री कांशीराम साहेब जी तथा बहनजी द्वारा स्थापित बहुजन आंदोलन की मूल विचारधारा (आम्बेडकरवाद) आत्मनिर्भरता, मान-सम्मान, स्वाभिमान...

कौन सी BAMCEF? मान्यवर साहेब की असली – या ब्राह्मणवादी वित्त पोषित नकली?

आज बहुजन संगठनों की महामारी में, जब बहुजन समाज के कानों में 'बामसेफ' का नाम गूँजता है, तो हृदय में एक अनिवार्य प्रश्न उदित...

न बिकने वाला बहुजन: मान्यवर साहेब का अमर मंत्र, बसपा का अटल संकल्प

बहुजन आन्दोलन के महान प्रणेता, मान्यवर श्री कांशीराम साहेब का वह उद्घोष आज भी बहुजन हृदय में गूँजता है—एक ऐसा संदेश जो न केवल...

‘समाज का कार्य, समाज के धन से ही हो सकता है, व्यक्तिगत से नहीं’ – बसपा आन्दोलन की आत्मनिर्भरता का अमर सूत्र

बहुजन आन्दोलन की आत्मनिर्भरता का मूल मन्त्र— "समाज का कार्य समाज के धन से ही सम्पन्न होता है, व्यक्तिगत से नहीं।" भारतीय सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में कुछ...

कठोर पत्थर, अमर संदेश: बहनजी का इतिहास-लेखन

जब इतिहास के पन्नों को मिटाने की साजिशें रची जाती हैं, तब पत्थर बोल उठते हैं। वे पत्थर जो न केवल कठोर होते हैं,...

भारतीय सामाजिक व्यवस्था में “ऊँच-नीच” की मानसिकता: एक भयंकर ब्रह्मणी रोग

भारतीय समाज की सबसे गहरी और लगभग अटूट बीमारी उसकी जाति-आधारित ऊँच-नीच की मानसिकता है, जिसे विद्वान व विचारक "ब्रह्मणी रोग" या ब्राह्मणवादी चेतना...

ईश्वर अल्लाह गॉड: नाम की लड़ाई या पहचान का अहंकार?

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सदियों से विविध धर्म, भाषाएँ और संस्कृतियाँ एक साथ साँस लेती आई हैं, एक-दूसरे के साथ फलती-फूलती रही...

राजनीतिक सत्ता से समतामूलक संस्कृति की ओर: बहुजन समाज की स्वतंत्र अस्मिता का उदय

भारतीय समाज और आधुनिक लोकतंत्र के गहन अध्ययन से एक अटल सत्य उभरकर सामने आता है—जिनकी सांस्कृतिक पहचान मजबूत है, उनके पास ही सामाजिक...

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