बहनजी: जनकल्याण की अमर आवाज़

न भूखंड है, न सिंहासन है,
न कोई राजमुकुट, न कोई ताज़ है,
फिर भी शान से खड़ी हैं वो,
भारत की एकमात्र बुलंद आवाज़ हैं।

जिधर नज़र घुमाती हैं,
अंधेरा काँपकर भाग जाता है,
दंगों का सरदार, गुंडों का सरताज,
खुद-ब-खुद तड़ीपार हो जाता है।

मुद्दा जो छुआ है उन्होंने,
वो अग्नि सा दहक गया,
एक छोटी सी चिंगारी से,
भड़क उठी राष्ट्र ज्वाला।

वो सिर्फ नेता नहीं, पार्टी नहीं,
वो तो अब एक जीवंत संस्था हैं,
एक दर्शन हैं, एक विचार हैं,
भारत अटल साधना, राष्ट्र का विश्वास हैं।

बाबासाहेब की करुणा-मूर्ति,
मान्यवर की संघर्ष-प्रदीप,
गरिमा से खड़ी हैं आज वो,
राष्ट्र-गौरव बहनजी बनकर।

जिनके कदमों संग आंदोलन चलता है,
जिनकी वाणी में गूँजती अमर क्रांति है,
सामाजिक परिवर्तन की वो अमर मुस्कान,
जिनसे मृत आशा फिर से जाग उठती है।

जनकल्याणकारी दिवस पर,
नमन है भारत महानायिका को,
जो मानव से ऊपर उठकर,
मानवता की जीती-जागती मिसाल बनीं।

हर कदम इतिहास रच रहा,
हर शब्द नई सुबह जगा रहा,
माँ भारती की गोद में
ज्योति बन, अमरत्व पा,
सृष्टि के अंत तक, प्राणों में प्राण बन,
निरंतर, निःशब्द, सदा प्रज्वलित रहिए।

(15.01.2026)


— लेखक —
(इन्द्रा साहेब – ‘A-LEF Series- 1 मान्यवर कांशीराम साहेब संगठन सिद्धांत एवं सूत्र’ और ‘A-LEF Series-2 राष्ट्र निर्माण की ओर (लेख संग्रह) भाग-1′ एवं ‘A-LEF Series-3 भाग-2‘ के लेखक हैं.)


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