17.1 C
New Delhi
Saturday, February 7, 2026

देश के संसाधनों पर पहला हक सिर्फ बहुजन समाज का: आकाश आनंद

बसपा के नेशनल कॉर्डिनेटर आकाश आनंद ने विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में हो रही जातीय भेदभाव को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होने कहा, “…हमारे समाज की शैक्षणिक तरक्की जिन मनुवादी मानसिकता वालों को पसंद नही आ रही है मैं उनको साफ कह रहा हूँ आप देश का नुकसान कर रहे हैं… इस देश और इसके संसाधन पर पहला हक सिर्फ और सिर्फ बहुजन समाज का है.”

आकाश आनंद ने कड़े शब्दों में मनुवादीयों की क्लास लगाई और उन्हे खूब खरी-खोटी सुनाई. उन्होने अपने वक्तव्य में कहा, “IIT दिल्ली की घटना के बारे में जानकर मन बेहद दुखी हो गया है. 21 साल के अनिल कुमार देश के भविष्य थे, लेकिन जातिवादी ताकतों ने उनकी जाल ले ली.”

उन्होने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “आज पूरे देश में लगभग हर दिन हमारे समाज को शारीरिक और मानसिक तौर पर जुल्म और ज्यादती झेलनी पड़ रही है. खासतौर से शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल में IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT मद्रास और IIT खड़गपुर से कई मामले सामने आए, जिसमें कुछ छात्रों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ गया. छात्र तो छात्र दिल्ली विश्व विद्यालय की प्रोफेसर डॉ रितू सिंह जैसे शिक्षकों को भी लगातार जातिवादी प्रताड़ना से जूझना पड़ रहा है.”

मनुवाद को देश के लिए नुकसान बताते हुए उन्होने आगे जोड़ा, “हमारे समाज की शैक्षणिक तरक्की जिन मनुवादी मानसिकता वालों को पसंद नहीं आ रही है मैं उनको साफ कह रहा हूँ आप देश का नुकसान कर रहे हैं. आपकी नीयत करोड़ों युवाओं का भविष्य बिगाड़ रही है.”

“इस देश और इसके संसाधनों पर पहला हक सिर्फ और सिर्फ बहुजन समाज का है. और सिर्फ बहुजन समाज ही इस देश का भला कर सकता है. मैं और मेरे जैसे करोड़ों युवा आज बेहद दुखी हैं और हम इसका कड़ा जवाब देंगे.”

Download Suchak App

खबरें अभी और भी हैं...

भारतीय सामाजिक व्यवस्था में “ऊँच-नीच” की मानसिकता: एक भयंकर ब्रह्मणी रोग

भारतीय समाज की सबसे गहरी और लगभग अटूट बीमारी उसकी जाति-आधारित ऊँच-नीच की मानसिकता है, जिसे विद्वान व विचारक "ब्रह्मणी रोग" या ब्राह्मणवादी चेतना...

ईश्वर अल्लाह गॉड: नाम की लड़ाई या पहचान का अहंकार?

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सदियों से विविध धर्म, भाषाएँ और संस्कृतियाँ एक साथ साँस लेती आई हैं, एक-दूसरे के साथ फलती-फूलती रही...

राजनीतिक सत्ता से समतामूलक संस्कृति की ओर: बहुजन समाज की स्वतंत्र अस्मिता का उदय

भारतीय समाज और आधुनिक लोकतंत्र के गहन अध्ययन से एक अटल सत्य उभरकर सामने आता है—जिनकी सांस्कृतिक पहचान मजबूत है, उनके पास ही सामाजिक...

भीमा कोरेगांव: जातिवाद पर विजय का ओजस्वी संदेश

दो सौ वर्ष पूर्व की वह गौरवमयी सुबह, जब भीमा नदी के तट पर पुणे के निकट कोरेगांव के मैदान में एक असाधारण महासंग्राम...

चमारों की चेतना: आग से राख, राख से सिंहासन

'चमारों की इतनी जुर्रत!चमार राजनीति करेगा!चमार भाषण सुनाएगा!चमार देश चलाएगा!यह कैसा कलियुग आ गया!' यह बात 1980 के मध्य दशक की है। बहुजन समाज पार्टी...

डीग में बसपा का संगठन समीक्षा एवं प्रशिक्षण शिविर, राजस्थान में मजबूती का संकल्प

डीग (भरतपुर), 30 सितंबर 2025 — बहुजन समाज पार्टी द्वारा आज विधानसभा स्तरीय संगठन समीक्षा एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन नगर (डीग) में किया...

Opinion: समाजिक परिवर्तन के साहेब – मान्यवर कांशीराम

भारतीय समाज सहस्राब्दी से वर्ण व्यवस्था में बंटा है. लिखित इतिहास का कोई पन्ना उठा लें, आपको वर्ण मिल जायेगा. ‌चाहे वह वेद-पुराण हो...

बिहार चुनाव 2025: BSP की तैयारी पूरी समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण फैंसलें

बिहार चुनाव: आगामी कुछ महीनों में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने चुनावी रणनीति को अंतिम रूप...

एससी, एसटी और ओबीसी का उपवर्गीकरण- दस मिथकों का खुलासा

मिथक 1: उपवर्गीकरण केवल तभी लागू हो सकता है जब क्रीमी लेयर लागू हो उपवर्गीकरण और क्रीमी लेयर दो अलग अवधारणाएँ हैं. एक समूह स्तर...

कर्नाटक में दलित आरक्षण का 6:6:5 फॉर्मूला तय; जानिए किसे कितना मिला आरक्षण?

बेंगलुरु: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने मंगलवार रात लंबी कैबिनेट बैठक में अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 17% आरक्षण को तीन हिस्सों में बांटने...

130वें संविधान संशोधन बिल पर मायावती का तीखा हमला, कहा- “लोकतंत्र होगा कमज़ोर”

नई दिल्ली। संसद में कल भारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने 130वाँ संविधान संशोधन बिल पेश किया. इस पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा)...

स्वतंत्र बहुजन राजनीति बनाम परतंत्र बहुजन राजनीति: प्रो विवेक कुमार

"स्वतंत्र बहुजन राजनीति" और "परतंत्र बहुजन राजनीति" पर प्रो विवेक कुमार का यह लेख भारत में दलित नेतृत्व की अनकही कहानी को उजागर करता...