मायावती ने अमेरिकी टैरिफ को बताया ‘विश्वासघाती’, संसद में चर्चा की मांग

Mayawati on Trump: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए भारी-भरकम 50 प्रतिशत टैरिफ को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे भारत के लिए एक “विश्वासघाती कदम” करार देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह निर्णय ‘मित्र देश’ भारत के साथ अन्यायपूर्ण और अविवेकी है. साथी ही उन्होंने केंद्र सरकार से इस चुनौती से निपटने के लिए संसद में गंभीर चर्चा की मांग की है, ताकि दीर्घकालीन रणनीति बनाई जा सके। मायावती ने अपने बयान में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव को समाप्त करने की अपील की, ताकि देशहित में एकजुट होकर इस आर्थिक संकट का सामना किया जा सके.

अमेरिका का टैरिफ: ‘अनुचित और अन्यायपूर्ण’

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने बयान में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ और रूस से तेल आयात पर पेनाल्टी लगाने की घोषणा देश के लिए एक बड़ा आघात है. उन्होंने केंद्र सरकार के बयान का हवाला देते हुए इसे ‘अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकी’ बताया, लेकिन साथ ही कहा कि जनता इसे ‘विश्वासघाती’ मान रही है. मायावती ने जोर दिया कि इस कदम से भारत की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए सरकार को परिपक्वता और एकजुटता दिखानी होगी. उन्होंने कहा, “देश की जनता डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम को मित्र देश भारत के प्रति विश्वासघात और देश को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देख रही है.”

मायावती ने आगे जोड़ा, ब्रिक्स देशों में ब्राज़ील के बाद भारत पर भी अमेरिका द्वारा कुल मिलाकर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है. भारत सरकार ने इसे संयमित बयान में ‘अनुचित, अन्यायपूर्ण व अविवेकी’ कहा है, जबकि देश की जनता इस कदम को प्रत्यक्ष रूप से भारत को कमजोर करने वाला मान रही है.

“राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठने की ज़रूरत”

मायावती ने कहा कि ऐसे वैश्विक आर्थिक हमलों से निपटने के लिए राजनीतिक संकीर्णता, मतभेद व द्वेष से ऊपर उठकर सभी दलों को एकजुटता दिखानी होगी. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश को इस चुनौती से निपटने के लिए अमन-चैन और कानून व्यवस्था के साथ दीर्घकालिक रणनीति पर कार्य करना चाहिए.

मायावती ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से संकीर्णता, मतभेद और द्वेष से ऊपर उठकर देशहित में एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस आर्थिक चुनौती से निपटने के लिए पूरे देश को एकसाथ मिलकर काम करना होगा. बसपा प्रमुख ने अपने कार्यकर्ताओं से भी इस दिशा में सक्रिय रहने और समाज को जागरूक करने की बात कही. उन्होंने पार्टी की नीतियों को डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सिद्धांतों से प्रेरित बताते हुए कहा कि बसपा हमेशा बहुजन समाज के सम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करती रहेगी.

संसद सत्र में हो गंभीर बहस: मायावती

उन्होंने मांग की कि इस विषय पर वर्तमान संसद सत्र में विशेष चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश एक साझा नीति के साथ आगे बढ़ सके. मायावती ने सवाल उठाया कि जब केंद्र और राज्य सरकारें आपसी खींचतान व आंतरिक संकीर्ण मुद्दों में उलझी रहेंगी, तो इतनी गंभीर चुनौती का समाधान कैसे निकलेगा?

उन्होंने कहा कि यह चुनौती गंभीर चिंतन और दीर्घकालीन रणनीति की मांग करती है. मायावती ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें आंतरिक संकीर्ण मुद्दों में उलझी रहीं, तो इस संकट से निपटना मुश्किल होगा.

बीएसपी की नीति ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’

मायावती ने इस अवसर पर यह भी दोहराया कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की नीति शुरू से ही संविधान की मंशा के अनुरूप ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रही है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लगातार बढ़ रहे राजनीतिक टकराव और अविश्वास को समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि यह समय देश के व्यापक हित में एकजुट होकर सोचने का है.

मायावती ने कहा, “देश में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच जो खींचतान और टकराव चल रहा है, उसे अब खत्म होना चाहिए। यह व्यापक जन और देशहित में है.” उन्होंने जोर दिया कि देश की एकता और कानून-व्यवस्था का माहौल बनाए रखना इस समय अत्यंत जरूरी है.

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