भारत की राजनीति के विशाल अखाड़े में एक अद्भुत सत्य उभरकर सामने आया है। भाजपा का वोट-बैंक, जैसे कोई प्राचीन हिमालय, अटल और अविचल खड़ा है। इस चुनाव में समस्त विपक्षी शक्तियाँ, जिनका एकमात्र उद्देश्य अपनी सत्ता की स्थापना न होकर मात्र ‘भाजपा को हराना’ था, एकजुट होकर भी उसकी एक ईंट भी नहीं हिला पाईं। यह दृश्य साक्षात साबित करता है कि भाजपा को सत्ता के सिंहासन से उतारने की सामर्थ्य किसी अन्य दल में नहीं, अपितु केवल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में निहित है।
जो पिछड़े, आदिवासी, दलित और समस्त वंचित वर्ग आज भी इस सत्य को नहीं समझ पाए हैं, उन्हें अब जागना होगा। शोषित समाज की मुक्ति का एकमात्र द्वार बसपा है। इतिहास साक्षी है—भाजपा एण्ड कंपनी को हराकर कांग्रेस एण्ड कंपनी को सत्ता सौंपना, फिर कांग्रेस को हराकर भाजपा को वापस बुलाना, मात्र एक चक्रव्यूह है। दोनों की रीति-नीति, दोनों का लक्ष्य, दोनों की विचारधारा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों शोषण की वही पुरानी व्यवस्था (मनुवादी व्यवस्था) को बनाए रखने में तत्पर हैं। एक को हटाकर दूसरे को लाने से शोषित जनता का क्या भला? मात्र सत्ता का पलट-फेर, मात्र नाम का परिवर्तन।
सच्चा उद्देश्य तो वह है जो बसपा ने अपना लिया है—सामाजिक परिवर्तन एवं आर्थिक मुक्ति। शोषित समाज को अब ‘एक को हटाकर दूसरे को लाना’ नहीं, अपितु स्वयं अपनी स्थिति को मजबूत करना है। स्वयं के लिए राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थान बनाना है। देश की बागडोर अपने हाथों में लेना है। बसपा यही संकल्प लेकर चल रही है। वह देश में सामाजिक परिवर्तन का वह ज्वालामुखी है जो सदियों के शोषण की जड़ों को जलाकर राख कर देगा। उसका उद्देश्य शोषित समाज की पूर्ण मुक्ति है, समतामूलक समाज का निर्माण है—जहाँ न कोई शोषक हो, न कोई शोषित; जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर, समान सम्मान और समान अधिकार प्राप्त हों।
यह कोई साधारण चुनावी नारा नहीं, अपितु एक महान सामाजिक क्रांति का निमंत्रण है। बसपा का पथ वह पथ है जहाँ शोषित जगत स्वयं अपना उद्धारकर्ता बनता है। जहाँ वह अपनी बेड़ियों को स्वयं तोड़ता है और नई सुबह का सूर्य स्वयं उदित करता है। अब समय आ गया है कि समस्त पिछड़े, आदिवासी और वंचित वर्ग इस ऐतिहासिक सत्य को समझें और बसपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उस सामाजिक परिवर्तन की यात्रा में शामिल हों, जिसका स्वप्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, मान्यवर कांशीराम साहेब और बहनजी ने देखा है।
खुद पर विश्वास कीजिए। मनुवादी सत्ता-चक्र टूटेगा। समता का सूर्य उदय होगा। और यह उदय बसपा के हाथों ही संभव है।


