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Sunday, January 11, 2026

किस्सा कांशीराम का #16: एक वोट और एक नोट की कहानी

1988 में इलाहबाद संसदीय सीट का उपचुनाव हुआ. वहां से मान्यवर साहब ने अपना नामांकन भरा. जहाँ एक तरफ कांग्रेस पार्टी मैदान में थी तो दूसरी तरफ सारी विपक्षी पार्टियों की ओर से वीपी सिंह चुनाव मैदान में थे. जिनके पास खर्च करने को करोड़ों रूपये थे.

मान्यवर साहब के पास वहां पर भी पैसों की बहुत कमी थी. इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने एक टीन (मतलब पीपा) का डिब्बा ख़रीदा और एक ठेला किराये पर लिया. ठेले पर गाना गानेवालों का साज-बाज रखा था और मान्यवर साहब स्वयं उस ठेले के पीछे-पीछे ‘एक वोट के साथ एक नोट’ डालनेवाला डिब्बा लेकर चलते थे.

गाना गानेवाले साथ-साथ चलते हुए कहते थे कि ‘नोट भी दे दो और वोट भी दे दो.’

इस प्रकार उन्होंने गाँव-गाँव, गली-गली घूमकर बहुजन समाज के लोगों से अपील की, कि “मैं निर्धन समाज की ओर से उम्मीदवार खड़ा हूँ. मेरा बहुजन समाज निर्धन समाज है. हमारा (निर्धन समाज का) मुकाबला धनवानों (मनुवादी समाज) से है.

मैं अभी आप लोगों से वोट मांगने आया हूँ. आपको यदि मुझे एक वोट डालना है तो उससे पहले मुझे अपने वोट के साथ एक नोट भी डालना है.  आप निर्धन समाज के लोग हैं. इसलिए आपको यदि मुझे वोट डालना है तो अभी से मन बना लें और एक वोट के साथ एक नोट भी डालना है.

हमारा चुनाव भर यह कार्यक्रम चलेगा. इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से वोट के लिए मतदान-पत्र का डिब्बा आयेगा. इसलिए इससे पहले मुझे अपना एक नोट मेरे डिब्बे में भी डालें ताकि मैं अंदाजा लगा सकूँ कि मुझे मेरे निर्धन समाज का इतना वोट जरूर मिलेगा.

मान्यवर साहब जिधर भी जाते समाज के लोग जिनको वोट डालना था उनके डिब्बे में एक रुपए का नोट डालने लगे. इसके साथ-साथ बसपा के कुछ पेन्टर कार्यकर्ता भी जुड़े उनको मान्यवर साहब ने बोला कि इलाहबाद की हर दीवार पर हाथी बना दो.

उन्होंने इलाहबाद की दीवारों पर एक लाख हाथी बना दिये. जहां कहीं पेंटरों को सीढ़ी की जरूरत पड़ती थी., स्वयं मान्यवर साहब उनको अपने कंधो पर उठा लेते थे. इसके आलावा उनका कोई प्रचार नहीं था.

उन हाथियों को देखकर अख़बार वाले भी कुछ लिखने लग गए कि कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों के वीपी सिंह के आलावा बहुजन समाज पार्टी का कांशीराम भी चुनाव मैदान में है.

जब चुनाव का दिन आया वोट पड़ा और वोटों कि गिनती हुई तो मान्यवर साहब को उतना ही वोट मिला था, जीतने नोट उनको पहले मिल चुके थे. कुल 86 हजार उनको नोट और वोट मिले थे और तीसरे स्थान पर रहे थे.

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