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Saturday, February 7, 2026

बसपा ने किया आदिवासी समाज की द्रौपदी मुर्मू का समर्थन; मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिया समर्थन

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती जी ने सभी अटकलों को शांत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी आदिवासी समाज से आने वाली द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी और वोटिंग के समय उनको ही वोट करेगी. उन्होने आज सुबह प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए यह जानकारी देश की जनता को दी. यह समर्थन बहुजन समाज का अभिन्न अंग आदिवासी समुदाय को दिया गया है ना कि किसी पार्टी को मायावती ने समर्थन देते हुए कहा.

मायावती ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी को विपक्ष द्वारा पूरी तरह इग्नोर किया गया है और उनसे राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनने के बारे में कोई बात नही की गई. ममता बनर्जी तथा शरद पवार द्वारा की गई बैठकों का जिक्र करते हुए उन्होने अपनी बात का समर्थन किया.

बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा;

  • बीएसपी ने देश के खासकर गरीबों, दलितों, आदिवासियों एवं अन्य उपेक्षित वर्गों आदि के हित में परमपूज्य बाबासाहब डॉ अम्बेडकर की तरह ही पत्थर काट कर अपना रास्ता खुद बनाने व इन वर्गों का हित एवं आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के लिए कभी भी किसी से कोई समझौता कतई नहीं किया और ना ही आगे कभी भी करेगी.
  • तथा अब वर्तमान में इसी के तहत ही हमारी पार्टी ने आदिवासी समाज को अपनी मूवमेंट का खास हिस्सा मानते हुए द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए अपना समर्थन देने का फैंसला लिया है.
  • और यह फैंसला ना तो बीजेपी व इनके एनडीए के पक्ष में और ना ही कांग्रेस व इनके यूपीए के विरोध में कोई सोचकर लिया है, बल्कि अपनी आर्टी व मूवमेंट को विशेष ध्यान में रखकर ही आदिवासी समाज की योग्य व कर्मठ महिला को देश का राष्ट्रपति बनाने के लिए यह खास फैंसला लिया है, हाँलाकि वह कितना फ्री होकर व बिना किसी दबाव के कार्य कर पायेंगी, यह तो आगे चलकर समय ही बतायेगा.
  • वैसे भी बहुजन समाज पार्टी ही देश की एकमात्र ऐसी जानी-मानी व पहचानी पार्टी है जिसका सर्वोच्च नेतृत्व यहाँ शुरु से ही दलित एवं अन्य उपेक्षित वर्गों के हाथों में ही रहा है और अभी भी है तथा जो किसी की भी अर्थात ना ही बीजेपी के एनडीए व कांग्रेस की व इनके किसी घटक दल की एवं अन्य किसी और भी गठबंधन व पार्टी की भी पिछलग्गू पार्टी नही है और ना ही दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों आदि की भी गुलामी करने वाली पार्टी है.
  • साथ ही, राष्ट्रपति चुनाव के सम्बन्ध में भाजपा जहाँ आम सहमति से सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार तय करने के लिए अपनी विपक्षी पार्टियों से सम्पर्क करने का दिखावा करती रही है, तो वहीं विपक्षी दल एक संयुक्त उम्मीदवार तय करने के लिए अपनी मनमानी बैठके करते रहे हैं और इन्होने उस प्रक्रिया से बीएसपी को अलग-थलग रखा है. यह सब इनकी जातिवादी मानसिकता नही तो और क्या है? इसीलिए बीएसपी ने स्वतंत्र व आजद होकर अपना यह फैंसला लेकर आज उसकी घोषणा भी कर दी है.
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