राजस्थान में बसपा की अनोखी पहल; घर-घर लग रहा नेमप्लेट और झंड़ा

राजस्थान: बहुजन समाज पार्टी इन दिनों देशभर में आने वाले विधानसभा चुनावों तथा लोकसभा की तैयारियों में जुटी हुई है. इसी के तहत राजस्थान में बसपा ने अपने कार्यकर्ताओं को एक जुट करने तथा उनका मनोबल बढ़ाने हेतु एक अनोखी पहल की शुरुआत की है. जिसके तहत प्रत्येक पदाधिकारी के घर उसके पद की नेमप्लेट और पार्टी का झंड़ा लगाया जाएगा. इसकी शुरुआत करने वाले अलवर जिले के बसपा जिलाध्यक्ष माननीय इंद्र कुमार बौद्ध जी अपने नेतृत्व में यह कार्य शुरु भी कर दिया है. और कई विधानसभाओं में नेमप्लेट और झंड़ा लगा चुके हैं.

इंद्र कुमार बौद्ध जी से बात करने पर उन्होने बताया कि, “बहुजन समाज पार्टी स्वाभिमान का मूवमेंट है और हमारे कार्यकर्ताओं को सिर्फ यही मान-सम्मान पार्टी से मिलता है. इसलिए, हमने अलवर जिले में इस अनोखे कार्य को करने का प्रण लिया और कार्यकर्ताओं की मदद से पूरा भी कर रहे हैं. सभी कार्यकर्ताओं में इसे लेकर काफी उत्साह है और वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लें रहे हैं.”

क्या है नेमप्लेट-झंड़ा पहल?

जैसा आपको ऊपर बताया इस पहल के दौरान पार्टी के सक्रिय और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के घर पर उनके खुद के नाम की नेमप्लेट और पार्टी का झंड़ा लगाया जा रहा है. नेमप्लेट में पदाधिकारी का नाम, उसका वर्तमान पद और पार्टी का नाम शामिल है. और इस प्लेट को पार्टी के प्रोटोकॉल के तहत ही तैयार करवाया गया है. इसलिए, नेमप्लेट नीले कलर में तैयार हुई है.

दूसरा, पार्टी का एक झंड़ा उस कार्यकर्ता के घर पर लगाया जा रहा है. और इसके बहाने पार्टी गांव-गांव में पहुँच रही है. साथ में पदाधिकारी के गांव, शहर में उसका मान-सम्मान पार्टी के जिलाध्यक्ष एवं अन्य पार्टी नेताओं के हाथों देख उसका रुतबा भी बढ़ रहा है.

क्या मायने है नेमप्लेट-झंड़ा पहल के?

अलवर जिले की विधानसभा किशनगढ़ बास से पंचायत समीति सदस्य (एमपीएस) माननीय हितेश रसगोन जी से जब पूछा गया कि इस पहल से पार्टी को क्या हासिल होगा तो उन्होने साफ-साफ कहा कि, “हमारी पार्टी आम जनता की पार्टी है और हमारा अधिकतर वोटर्स गांव-देहात में रहता हैं. इसलिए, हम इस नेमप्लेट-झंड़ा पहल के बहाने अपने वोटर्स के बीच पहुँचना चाहते हैं. हम अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से सीधे अपने वोटर्स तक पहुँचने में सफल भी हुए हैं.”

आगे उन्होने बताया कि, “बसपा के खिलाफ़ मिस इंफोर्मेशन बहुत ज्यादा फैलाई जाती है. खासकर चुनाव के समय इनकी संख्या में बहुत इजाफा हो जाता है. मसलन, बसपा तो केवल चुनावों के समय ही दिखाई देती है. लेकिन, ऐसा नही है. इस देश में केवल बसपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो हमेशा जनता के बीच और जनता की समस्याओं पर आवाज बुलंद करती रहती है. इसलिए, इस धारना को तोड़ने में भी इस नेमप्लेट-झंड़ा पहल से हमें फायदा होगा.”

बता दें राजस्थान में 2023 में विधानसभा चुनाव होंगे. इसलिए पार्टी पहले अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को तैयार करने में जुटी हुई है ताकि चुनाव के समय पार्टी का सारा ध्यान चुनाव जीतने की रणनीति पर लगा रहे.

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