बसपा सुप्रीमो मायावती जी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी और दिल्ली स्थित मस्जिद/मदरसों के उमेलाओं कि मुलाकात पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होने कहा, “आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत द्वारा कल दिल्ली स्थित मस्जिद/मदरसे में जाकर उलेमाओं से मुलाकात करने और फिर उनसे अपने आपको ‘राष्ट्रपिता’ व ‘राष्ट्र ऋषि’ कहलवाने के बाद क्या बीजेपी व इनकी सरकारों का मुस्लिम समाज व उनके मस्जिद-मदरसों के प्रति नकारात्मक रुख व बर्ताव में बदलाव आएगा? … आरएसएस प्रमुख की गहरी चुप्पी के क्या मायने निकल रहे हैं इस पर भी वे जरूर गौर करें.”
1.आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत द्वारा कल दिल्ली स्थित मस्जिद/मदरसे में जाकर उलेमाओं से मुलाकात करने और फिर उनसे अपने आपको ’राष्ट्रपिता’ व ’राष्ट्र ऋषि’ कहलवाने के बाद क्या बीजेपी व इनकी सरकारों का मुस्लिम समाज व उनके मस्जिद-मदरसों के प्रति नकारात्मक रुख व बर्ताव में बदलाव आएगा?
— Mayawati (@Mayawati) September 23, 2022
अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए बहनजी ने जोड़ा, “यूपी सरकार खुली जगह में कुछ मिनट की अकेले में नमाज पढ़ने की मजबूरी को भी सहन नहीं कर पा रही है तथा सरकारी मदरसों की उपेक्षा करते हुए निजी मदरसों में भी हस्तक्षेप पर उतारू है, किंतु आरएसएस प्रमुख की इस बारे में गहरी चुप्पी के क्या मायने निकल रहे हैं इस बर भी वे जरूर गौर करें.”
बता दें अपने इस बयान से मायावती जी ने मुस्लमानों को साधने की कोशिश की है और सही मुद्दे को उठाया है. कल आरएसएस प्रमुख के मिलन के बाद जो कयास लग रहे थे. उन्हे बहनजी ने तोड़ दिया और हिंदू-मुसलमान मिलन कितना पक्का है उसकी मिसाल पेश करके मुसलमान भाईयों को आगाह किया.

