बाबासाहेब के पौते प्रकाश अम्बेड़कर ने पूछे कांग्रेस से 7 सवाल; जनता के सामने खोली दिखावे की पोल

कांग्रेस अपने सांसद राहुल गांधी की सांसदी बहाल होने का जश्न मना रही है. और देश में चल रही समस्याओं पर आंखे मूंद ली है. इसलिए, कांगेस और उसके नेताओं की पोल खोलने के लिए बाबासाहेब के पोते और वंचित बहुजन अघाड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश अम्बेड़कर जी ने कांग्रेस से सात सवाल पूछे हैं.

प्रकाश अम्बेड़कर के सात सवाल

प्रकाश अम्बेड़कर जी आज सवेरे एक्स एप (पहले ट्वीटर) पर पोस्ट कर इन सात सवालों को पूछा है.

सवाल #1: कांग्रेस और उसके सहयोगी खानापूर्ती करने के बजाए दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के वास्तविक मुद्दों को कब उठाएंगे? मणिपुर हिंसा और नूंह हिंसा पर भी आपकी प्रतिक्रिया देर से आई जिसमें शुद्ध राजनीति की बू आ रही थी.

सवाल #2: कांग्रेस ने बेरहम Data Protection Bill की चर्चा में भाग क्यों नही लिया? इस बिल को फूड डिलिवरी एप के ओर्डर से भी जल्दी पास कर दिया गया.

सवाल #3: कांग्रेस लैपटॉप आयात पर प्रतिबंध लगाने की सरकार की हालिया नीति पर कब घेरने जा रही है, जो सीधे तौर पर एक विशेष विनिर्माण उद्यम को मदद करती है, जिससे उसके शेयर भी बढ़े हैं? भारत में भ्रष्टाचार का बीज – चुनावी बांड पर आपका क्या रुख है?

सवाल #4: गठबंधन (I.N.D.I.A.) मणिपुर संकट पर असली सवाल – हिंदू मैतई को आदिवासी (ST) का दर्जा क्यों दिया गया? किस पार्टी ने यह प्रक्रिया शुरु की? फैसले पर आपके गठबंधन का क्या रुख है?

सवाल #5: क्या आप सरकार के आंकड़ों और जवाब से सहमत हैं, जो सदनों (लोकसभा तथा राज्यसभा) में बार-बार दोहराया गया है कि हाथ से मैला ढोने की प्रथा बंद हो गई है?

सवाल #6: आप अपनी गारंटी योजनाओं के लिए एससी उप-योजना और एसटी उप-योजना (एससीएसपी और टीएसपी) फंड को डायवर्ट करने के कर्नाटक सरकार के फैंसले को कैसे समझाएंगे?

सवाल #7: अगर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी लगातार हिंदू राष्ट्र की मांग करने वाले बागेश्वर बाबा की मेजबानी कर रहे हैं तो कांग्रेस बीजेपी से कैसे अलग है?

कांग्रेस की तरफ से अभी तक इन सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नही है. और ना ही उनको एक्स एप पर कोई जवाब दिया गया है.

वैसे इन सात सवालों ने कांग्रेस के दिखावे की पोल जनता के सामने खोलकर रख दी है. जिस तरह से कांग्रेस का ध्यान सिर्फ फोर तौर पर बीजेपी को घेरना है उससे जाहिर की कांग्रेस देश की जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर चिंतित नही है. बल्कि, सिर्फ मोदी विरोध में जनता से सहानुभूति चाह रही है.

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