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Tuesday, February 24, 2026

पराये धन के सहारे नहीं, बहुजन के सहारे चलती है बसपा – बहनजी का अटल स्वाभिमान

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और उसके संस्थापक-मान्यवर श्री कांशीराम साहेब जी तथा बहनजी द्वारा स्थापित बहुजन आंदोलन की मूल विचारधारा (आम्बेडकरवाद) आत्मनिर्भरता, मान-सम्मान, स्वाभिमान और समाज के हितों को सर्वोपरि रखने पर आधारित है। इसी सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए बसपा ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि उसका संगठनात्मक और राजनीतिक कार्य समाज के आम लोगों के छोटे-छोटे योगदान से ही चले, न कि किसी बड़े धनाढ्य, उद्योगपति या कॉर्पोरेट घराने के भारी-भरकम चंदे पर निर्भर हो।

इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कथन है:

“समाज का कार्य समाज के धन से ही हो सकता है, व्यक्तिगत से नहीं।”

यह विचार बहुजन आंदोलन की आत्मनिर्भरता का मूल मंत्र है, जो बताता है कि यदि कोई राजनीतिक शक्ति या सामाजिक आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष या पराये धन-शक्ति के सहारे पर टिका रहेगा, तो वह स्वतंत्र निर्णय लेने में असमर्थ हो जाएगा और अंततः उसी के इशारों पर नाचने को मजबूर होगा।

इसी सिद्धांत का जीवंत प्रमाण इलेक्टोरल बॉन्ड योजना में देखने को मिला, जहां भारत की लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियां—चाहे सत्ताधारी हों या विपक्षी—अरबों-खरबों रुपये के चंदे बड़े-बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों से प्राप्त करती रहीं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2024 में इस योजना को असंवैधानिक घोषित करने के बाद जारी आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि बसपा एकमात्र प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी रही, जिसने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से एक भी रुपया प्राप्त नहीं किया। विभिन्न रिपोर्ट्स (जैसे ADR, The Hindu आदि) और चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बसपा ने न केवल इलेक्टोरल बॉन्ड से दूरी बनाए रखी, बल्कि अपने आर्थिक स्रोतों को पारदर्शी भी बनाये रखा। बहुजन समाज पार्टी की आय मुख्यतः सदस्यता शुल्क, कार्यकर्ताओं, समर्थकों व आन्दोलन से जुड़े सक्षम लोगों के छोटे-छोटे योगदान से ही आती है।

यह निर्णय बसपा अध्यक्षा बहन मायावती जी (बहनजी) के नेतृत्व में बहुजन राजनीति की उस अटल प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो बाबासाहेब के संविधान-निर्माण, मान्यवर श्री कांशीराम साहेब जी के संगठन-निर्माण और बहुजन आंदोलन की मूल भावना से जुड़ी हुई है। आज जब अन्य पार्टियां बड़े चंदों के कारण नीतियों में समझौता कर रही हैं, तब भी बसपा ने सिद्ध किया कि सच्ची राजनीति समाज की सेवा के लिए होनी चाहिए, न कि धन-शक्ति के आगे झुकने के लिए।

“यदि आप किसी का सहारा लेंगे तो आपको उसका इशारा भी मिलेगा।” मान्यवर साहेब का यह मंत्र बहुजन आंदोलन की राजनीतिक समझदारी को रेखांकित करता है। इलेक्टोरल बॉन्ड के खुलासे ने साबित कर दिया कि बसपा ने न केवल धन के लालच से बचकर अपनी गरिमा बनाए रखी, बल्कि बहुजन समाज को यह संदेश भी दिया कि मानवतावादी आन्दोलन की आत्मनिर्भरता ही उसकी सफलता की कुंजी है’।

यह उपलब्धि बसपा को अन्य पार्टियों से अलग करती है और बहुजन समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती है—कि समाज का उत्थान, सामाजिक परिवर्तन का आन्दोलन और आत्मनिर्भर राजनीतिक संघर्ष केवल समाज के अपने संसाधनों और एकजुटता से ही संभव है, बाहरी धन-बल के भरोसे नहीं। बसपा का यह रुख न केवल वित्तीय पारदर्शिता का प्रतीक है, बल्कि बहुजन आंदोलन की वैचारिक शुद्धता और दीर्घकालिक संघर्ष की मजबूती का भी प्रमाण है।


— लेखक —
(इन्द्रा साहेब – ‘A-LEF Series- 1 मान्यवर कांशीराम साहेब संगठन सिद्धांत एवं सूत्र’ और ‘A-LEF Series-2 राष्ट्र निर्माण की ओर (लेख संग्रह) भाग-1′ एवं ‘A-LEF Series-3 भाग-2‘ के लेखक हैं.)


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