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Thursday, February 26, 2026

बसपा की असली जीत—शोषितों का जगा मनोबल है

भारतीय राजनीति के विशाल मंच पर जहाँ पार्टियाँ सत्ता की चकाचौंध में रंग-बिरंगे नृत्य करती दिखती हैं, वहाँ कांग्रेस का वंशानुगत विरासतवाद, भाजपा का हिन्दुत्व का गरजता हुआ उद्घोष और समाजवादी पार्टी जैसे छोटे-मोटे दलों का मुस्लिम तुष्टिकरण व क्षेत्रीय समीकरणों का जाल—ये सब तुष्टिकरण की राजनीति के विभिन्न रूप हैं। इनका आधार प्रायः तुष्टिकरण है, वोटों का व्यापार है, सत्ता की लोलुपता है। किन्तु बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इन सबसे सर्वथा भिन्न है—एक स्वतंत्र नदी की भाँति, जो किसी भी मुख्यधारा की गुलामी स्वीकार नहीं करती। उसकी रणनीति आत्मनिर्भर है, उसका उद्देश्य न तो भीड़ को लुभाना है, न किसी वर्ग को खुश करना है। उसका एकमात्र लक्ष्य है—सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति का वह महासंघर्ष, जिसमें बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की ज्योति अनवरत जलती रहती है।

जो लोग बसपा को मात्र जीती हुई सीटों की गिनती से आँकते हैं, वे भारतीय राजनीति के उस भ्रामक ट्रैक पर भटक रहे हैं जहाँ सत्ता मात्र को ही सफलता का पर्याय मान लिया गया है। बसपा का सही आकलन सीटों से नहीं, बल्कि देश में उभरती दलित-केंद्रित राजनीति की लहर से करना चाहिए। देखिए उन लाखों दलित-बहुजन युवाओं की आँखों में जगमगाती उस नई चमक को, जो सदियों के अपमान और शोषण की काली रात को चीरकर उग आई है। देखिए उनके मनोबल को, जो अब टूटने वाला नहीं, बल्कि पर्वतों की तरह अटल है। आज के भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में आदरणीया बहन कुमारी मायावती जी का आत्मनिर्भर स्टैंड ही बसपा व बहुजन समाज की सबसे तेजस्वी पहचान है। वे न किसी के सम्मुख नतमस्तक होती हैं, न किसी की कृपा पर आश्रित। वे स्वयं एक ऊँचा, अटूट कद हैं—एक ऐसा कद, जो उत्तर प्रदेश की सीमाओं को लाँघकर समूचे भारत की सामाजिक चेतना को नई ऊँचाई प्रदान करता है।

बसपा को केवल एक राजनीतिक दल समझना उसके महान संघर्ष का अपमान होगा। वह तो एक जीवन्त आन्दोलन है—वह आन्दोलन जो बाबासाहेब के मिशन को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाता है। सबसे अल्प समय में, निरन्तरता के साथ, अपने करोड़ों कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा स्वेच्छा से दिये गये शुद्ध आर्थिक सहयोग से खड़ा यह आत्मनिर्भर संगठन आज पूरे भारत में अद्वितीय है। कोई अन्य दल, कोई अन्य मंच इतनी दृढ़ता से, इतने स्वाभिमान से अपनी जड़ें जमाने में सफल नहीं हुआ। बसपा के कार्यकर्ता न सरकारी अनुदानों के भिखारी हैं, न किसी पूँजीपति के दान पर निर्भर। वे अपना रक्त, अपना पसीना, अपना धन स्वयं अर्पित करते हैं—क्योंकि यह आन्दोलन उनकी अपनी मुक्ति का, उनके स्वाभिमान का आन्दोलन है।

बहुजन समाज को जिस मान, सम्मान और स्वाभिमान की तड़प सदियों से सताती रही, उसे मान्यवर साहेब के दिशा-निर्देशन में बाबासाहेब के बताए मार्ग पर चलकर बसपा और बहनजी ने न केवल पूरा किया, बल्कि उसे अमरत्व का वरदान दे दिया। उन्होंने सिखाया कि सम्मान भीख में नहीं मिलता, वह संघर्ष की ज्वाला से जन्म लेता है। स्वाभिमान किसी की दया का उपहार नहीं, बल्कि अपनी शक्ति व संघर्ष का प्रतिफल है। देश के दलित और पिछड़े भले ही इस सत्य को समझने में कुछ देरी कर दें, किन्तु बसपा के कट्टर विरोधी इसे गहराई से जानते हैं। वे जानते हैं कि बसपा की जड़ें भूमि की गहराइयों में इतनी मजबूत हैं कि कोई तूफान, कोई षड्यंत्र उन्हें हिला नहीं सकता। वे जानते हैं कि यह आन्दोलन वोट-बैंक की सतही राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति का अनिवार्य महासंघर्ष है।

बसपा बाबासाहेब अम्बेडकर का साक्षात् मिशन है। वह देश के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यक समाज के मान, सम्मान तथा स्वाभिमान का पावनतम आन्दोलन है। आदरणीया बहनजी इस आन्दोलन की जीवन्त प्रतीक हैं—वे वह अद्भुद प्रतीक हैं जो करोड़ों दबे-कुचले हृदयों में बस गया है। जब वे मंच पर खड़ी होती हैं, तो लगता है मानो संविधान शरीर धारण करके उद्घोष कर रहा हो। जब वे निर्णय लेती हैं, तो लगता है मानो बाबासाहेब का हाथ मार्गदर्शन कर रहा हो। उनकी हर बात में लाखों शहीदों का बलिदान गूँजता है, उनकी हर मुस्कान में बहुजन भारत का उज्ज्वल भविष्य झलकता है।

आज जब समूची राजनीति सत्ता के खेल में उलझी हुई है, बसपा हमें याद दिलाती है कि असली राजनीति जनता की मुक्ति की राजनीति होती है। सीटें तो आती-जाती रहती हैं, किन्तु विचारों की ज्योति कभी बुझती नहीं। बसपा का उद्देश्य है—सामाजिक परिवर्तन आर्थिक मुक्ति। बसपा का आदर्श शासन सिद्धांत है—’सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ जोकि ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ का विस्तार है। और जब तक यह विचार हृदयों में जीवित रहेगा, तब तक यह आन्दोलन अनवरत त्वरित वेग से गतिमान रहेगा।

यह आन्दोलन बढ़ेगा, फैलेगा, क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, पूरे बहुजन समाज का अपना आन्दोलन है। और जब कोई समाज स्वयं अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है—तब कोई शक्ति उसे नतमस्तक नहीं कर सकती, कोई ताकत उसे पराजित नहीं कर सकती।


— लेखक —
(इन्द्रा साहेब – ‘A-LEF Series- 1 मान्यवर कांशीराम साहेब संगठन सिद्धांत एवं सूत्र’ और ‘A-LEF Series-2 राष्ट्र निर्माण की ओर (लेख संग्रह) भाग-1′ एवं ‘A-LEF Series-3 भाग-2‘ के लेखक हैं.)


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