बहुजन की ज्वलंत ज्योति: बहनजी का ओज, बसपा का अटल वैभव

जब जगतगुरु संत शिरोमणि गुरु रैदास की जयंती पर गुरु बाबा रैदास की प्रतिमा/चित्र के सम्मुख समाजवादी पार्टी, श्री अखिलेश यादव और इनके उद्दंड नेता व गुंडों का समर्थक झुंड घुटने टेक कर नतमस्तक नजर आता है, तब यह दृश्य श्रद्धा का उत्सव का नहीं, बहनजी और बसपा द्वारा पैदा की गई मजबूरी का होता है—यह सपाइयों के गालों पर इतिहास का वह झन्नाटेदार तमाचा है जो बहुजन की अजेय शक्ति—बहनजी और बसपा—ने इन जातिवादियों के गालों पर जड़ दिया है! ये वही सपा, जिसने बहनजी के शासनकाल में निर्मित जिले ‘संत रैदास नगर’ की गरिमामयी पहचान को रौंदकर उसे साधारण ‘भदोही’ में बदल डाला था—उसी संत की जयंती पर आज ये पाखंडी सपाई नाच-नाच कर खुद का पैर तोड़ रहे हैं। यह कोई प्रेम नहीं, यह मजबूरी है! यह कोई सद्बुद्धि नहीं, यह बहुजन चेतना की वह धधकती अग्नि है जिसने सारे विरोधियों को दलित-बहुजन के सम्मुख घुटने टेकने को मजबूर कर दिया है।

मान्यवर श्री कांशीराम साहेब को भारत रत्न देने की पुकार आज कांग्रेस और सपा दोनों ही कलेजा फाड़ कर जोर-शोर से लगा रही हैं। परंतु इतिहास की तलवार याद दिलाती है—जब केंद्र में कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में सपा सत्ता में थीं, तब मान्यवर के महापरिनिर्वाण पर एक दिन का राजकीय अवकाश तक घोषित नहीं किया गया था। सपा की सरकार ने बसपा द्वारा बनाये जिले ‘मान्यवर श्री कांशीराम नगर’ का नाम बदलकर कासगंज किया। मान्यवर साहेब के नाम पर बने बांदा के कृषि विश्वविद्यालय और सहारनपुर के चिकित्सा विश्वविद्यालय का नाम तक सपा ने ही परिवर्तित किया था। यह अपमान था, यह घोर तिरस्कार था—भारत लोकतंत्रीकरण के महानायक मान्यवर श्री कांशीराम साहेब का!

बहनजी ने आज ऐसी परिस्थिति उत्पन्न कर दी है कि कांग्रेस (श्री राहुल गांधी) बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को सिर-माथे चढ़ाए घूम रही हैं, जबकि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने बाबासाहेब का सबसे ज्यादा अपमान किया है, चुनावी धांधली से उन्हें हराया और उन्हें इतिहास का वह प्रथम योद्धा बनने को मजबूर किया जिन्होंने चुनाव आयोग को 18 पृष्ठों की ललकार भरी याचिका थमाई।

सपा (श्री अखिलेश यादव) तो इससे भी नीचे गिरी—बाबासाहेब, मान्यवर साहेब, शाहूजी महाराज, ज्योतिबा फुले, नारायणा गुरु और जगतगुरु संत शिरोमणि गुरु रैदास जैसे महान क्रांतिकारियों से घृणा की, बहनजी द्वारा निर्मित ‘अम्बेडकर पार्क लखनऊ’ पर बुलडोजर चलाने की धमकी तक दी। आज वही सपा उनके नाम पर वोट मांगने को विवश हैं—यह बहुजन समाज को बहनजी की दी हुई आत्मनिर्भरता की विजय है!

बहनजी और बहुजन समाज पार्टी ने बहुजन को वह ओजस्वी पहचान दी है जो अब कोई ताकत छीन नहीं सकती। उन्होंने दलित-बहुजन को वोट बैंक नहीं—स्वाभिमानी योद्धा बनाया! उन्होंने दलित-बहुजन सन्तों-गुरुओं-महापुरुषों की प्रतिमाएँ खड़ी कीं, उनके नाम पर नगर बसाए, स्मारक बनवाए, शिक्षा के भव्य भवन स्थापित किए। बहनजी ने सिखाया—तुम्हारी गरिमा किसी की दया पर नहीं, तुम्हारे संघर्ष, तुम्हारे संगठन, तुम्हारे ज्ञान और तुम्हारे अटल आत्मसम्मान पर टिकी है। आज कांग्रेस हो, भाजपा हो, सपा हो, राजद हो, टीएमसी हो या आप आदि—सभी बसपा द्वारा स्थापित दलित-बहुजन महापुरुषों को सिर पर उठाए गली-गली भटक रहे हैं। ये सभी दलित-बहुजन विरोधी दल, नेता और इनके गुंडे किस्म के समर्थक जिन दलित-बहुजन महापुरुषों से कल तक घृणा करते थे, आज उन्हीं बाबासाहेब, मान्यवर साहेब, गुरु रैदास आदि सभी दलित-बहुजन संतों, गुरूओ व महापुरुषों के चरणों में लोट-पोट हो रहे हैं। यह कोई संयोग नहीं—यह बहनजी के यशस्वी प्रताप, दृढ़ संकल्प, दूरदर्शी और अग्निमय नेतृत्व का परिणाम है!

बहनजी ने सिद्ध कर दिया कि जब बहुजन समाज अपनी जड़ों से जुड़ जाता है, अपनी विरासत पर गर्व करता है और आत्मनिर्भर हो उठता है—तब सारी जातिवादी, ब्राह्मणवादी, पाखंडी और सत्ता-लोलुप शक्तियाँ उसके सामने घुटने टेक देती हैं। उन्होंने न केवल बहुजन समाज को मुक्ति का मार्ग दिखाया, बल्कि पूरे राष्ट्र को यह घोषणा दी कि सच्चा लोकतंत्र तब तक अधूरा है जब तक बहुजन की आवाज, बहुजन की संस्कृति और बहुजन का सम्मान सिंहासन पर नहीं विराजता।

यह ज्योति अब कभी मद्धिम नहीं होगी! यह बहुजन की अमर, यशस्वी, ओजस्वी आत्मनिर्भरता की ज्वाला है—जिसकी लपटों में सारी राजनीतिक कपट, झूठे चेहरे बेनकाब हो गये और सत्ता की माया भस्म हो जाती है। धन्य हैं बहनजी! धन्य है बसपा! आपने बहुजन को वह अग्निमय चिरस्थाई चेतना दी जो अब सदा प्रज्ज्वलित रहेगी—एक ऐसे भारत की स्थापना के लिए जहाँ समता की ललकार हर कोने में गूँजे, स्वतंत्रता की बयार निरंतर बहे, न्याय की जय हो, बंधुत्व का बोलबाला हो, और मानवता का विजय-गान बजे!


— लेखक —
(इन्द्रा साहेब – ‘A-LEF Series- 1 मान्यवर कांशीराम साहेब संगठन सिद्धांत एवं सूत्र’ और ‘A-LEF Series-2 राष्ट्र निर्माण की ओर (लेख संग्रह) भाग-1′ एवं ‘A-LEF Series-3 भाग-2‘ के लेखक हैं.)


Buy Now LEF Book by Indra Saheb
Download Suchak App

खबरें अभी और भी हैं...

बहुजन मिशन के योद्धा की अनिवार्य त्रिवेणी: W = T₁ × T₂ × T₃

मिशन (बहुजन समाज पार्टी) के सच्चे कार्यकर्ता की पहचान एक सरल किंतु गहन सूत्र में निहित है—W = T₁ × T₂ × T₃। यह...

चमचा वर्ग: बहुजन आंदोलन का सबसे खतरनाक दुश्मन

बहुजन आंदोलन की राह हमेशा काँटों भरी रही है। कोई भी बड़ा सृजनात्मक और सकारात्मक बदलाव, चाहे वह सामाजिक हो, सांस्कृतिक हो या राजनैतिक,...

संक्रमण काल: तरुणावस्था की अग्निपरीक्षा और बहुजन आंदोलन का अमर-उदय

जीवन एक नाट्यशाला है, जहाँ प्रत्येक पात्र को अपनी भूमिका निभाते हुए एक निश्चित 'संक्रमण काल' से गुजरना ही पड़ता है। यह काल न...

आर्थिक आत्मनिर्भरता: बहुजन आंदोलन की ताकत

बहुजन समाज पार्टी के मिशन में एक छोटी-सी बात बार-बार दोहराई जाती है, लेकिन उसका गहरा अर्थ बहुत कम लोग समझ पाते हैं। जो...

प्रश्नों की हत्या और ईश्वर का भ्रम

मानव-मन की सबसे गहन जिज्ञासा वह नहीं है जो तारों की दूरी मापती है, न ही वह जो समुद्र की गहराई को छूने की...

मान्यवर साहेब की अमर त्रयी: बहुजन समाज, बसपा और बहनजी

मान्यवर श्री कांशीराम साहेब भारतीय राजनीति और सामाजिक परिवर्तन के इतिहास में एक ऐसे दार्शनिक के रूप में उभरे, जिन्होंने दबे-कुचले वर्गों को सशक्त...

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’: बहन मायावती जी का दर्शन

भारतीय राजनीति और समाज सुधार के इतिहास में कुछेक व्यक्तित्व ऐसे हुए हैं जिन्होंने न केवल अपने ऐतिहासिक कार्यों एवं विचारों से समाज को...

बसपा की असली जीत—शोषितों का जगा मनोबल है

भारतीय राजनीति के विशाल मंच पर जहाँ पार्टियाँ सत्ता की चकाचौंध में रंग-बिरंगे नृत्य करती दिखती हैं, वहाँ कांग्रेस का वंशानुगत विरासतवाद, भाजपा का...

पराये धन के सहारे नहीं, बहुजन के सहारे चलती है बसपा – बहनजी का अटल स्वाभिमान

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और उसके संस्थापक-मान्यवर श्री कांशीराम साहेब जी तथा बहनजी द्वारा स्थापित बहुजन आंदोलन की मूल विचारधारा (आम्बेडकरवाद) आत्मनिर्भरता, मान-सम्मान, स्वाभिमान...

कौन सी BAMCEF? मान्यवर साहेब की असली – या ब्राह्मणवादी वित्त पोषित नकली?

आज बहुजन संगठनों की महामारी में, जब बहुजन समाज के कानों में 'बामसेफ' का नाम गूँजता है, तो हृदय में एक अनिवार्य प्रश्न उदित...

न बिकने वाला बहुजन: मान्यवर साहेब का अमर मंत्र, बसपा का अटल संकल्प

बहुजन आन्दोलन के महान प्रणेता, मान्यवर श्री कांशीराम साहेब का वह उद्घोष आज भी बहुजन हृदय में गूँजता है—एक ऐसा संदेश जो न केवल...

‘समाज का कार्य, समाज के धन से ही हो सकता है, व्यक्तिगत से नहीं’ – बसपा आन्दोलन की आत्मनिर्भरता का अमर सूत्र

बहुजन आन्दोलन की आत्मनिर्भरता का मूल मन्त्र— "समाज का कार्य समाज के धन से ही सम्पन्न होता है, व्यक्तिगत से नहीं।" भारतीय सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में कुछ...