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Saturday, February 7, 2026

B-Team पर कांग्रेस-भाजपा को लताड़ा; प्रकाश अम्बेड़कर ने कहा मैं फुले-शाहू-अम्बेड़कर की टीम हूँ

महाराष्ट्र: बाबासाहेब के पौत और वंचित बहुजन अघाड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश अम्बेड़कर जी ने बी-टीम टैग को लेकर कांग्रेस और भाजपा को बड़ा लताड़ा है और दोनों पार्टियों की पोल खोलने का काम किया है.

उन्होने आज X पोस्ट पर बड़ी ही लंबी बात कहकर बी-टीम की बहस को छेड़कर और उस पर करारा जवाब देकर कांग्रेस-भाजपा की बोलती बंद कर दी है.

मैं फुले शाहू अम्बेड़कर की टीम हूँ

बालासाहेब ने अपनी पोस्ट में सीधा लिखा है कि, “जहाँ तक बी-टीम का सवाल है, मैं टीम फुले हूँ. मैं टीम शाहू हूँ. मैं टीम अम्बेड़कर हूँ.”

आगे वो कहते हैं, “कांग्रेस मुझे भाजपा की बी-टीम कहती है. भाजपा मुझे कांग्रेस की बी-टीम कहती है.

स्वतंत्र फुले-शाहू-अम्बेड़कर नेतृत्व स्थापित करने और वंचितों और बहुजनों के लिए लड़ने की महत्वाकांक्षा और आकांक्षा रखने का यह अभिशाप है.

वे मुझे गाली देंगे, मुझे अपमानजनक नामों से पुकारेंगे, मेरे खिलाफ झूठा प्रचार करेंगे क्योंकि मैं उनका चाटुकार और उनका राजनीतिक गुलाम नहीं बनना चाहता.

समय गवाह है कि कैसे इन पार्टियों ने दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और मुसलमान को समय-समय पर, साल-दर-साल धोखा दिया है…”

बाबासाहेब को किया याद

प्रकाश अम्बेड़कर जी ने अपने दादाजी और राष्ट्रनिर्माता बाबासाहेब के कथन को लिखते हुए समाज की सच्चाई और कांग्रेस-भाजपा की अंदरूनी मिलीभगत को उजागर करते हैं.

वो कहते हैं, “मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि बाबासाहेब ने मार्च, 1956 को अपने ऐतिहासिक भाषण में क्या कहा था –

अगर कोई तुम्हे अपने महल में बुलाए तो तुम जाने के लिए स्वतंत्र हो. लेकिन, अपनी झोपड़ी जलाकर मता जाओ. अगर, कल मालिक तुम्हे अपने महल से निकाल दे तो तुम कहाँ जाओगे? अगर तुम खुद को बेचना चाहते हो तो बेचो लेकिन अपने संगठन को किसी भी तरह से नुकसान मत पहुँचाओ. मैं दूसरों से कोई नुकसान महसूस नही करता लेकिन मैं अपने लोगों से डरता हूँ.

यही वही बात है जो बाबासाहेब ने 68 साल पहले कही थी और आज भी प्रासंगिक है.

कुछ लोग सिर्फ अपने महलों को बचाने के लिए संविधान को चमका रहे हैं. उन्होने कभी संविधान का सम्मान नहीं किया और न ही वंचितों और बहुजनों को उनके अधिकार दिए.

अगर उन्होने इसका सम्मान किया होता, तो हम आज फुले, शाहू और अम्बेड़कर की विचारधार के लिए नहीं लड़ रहे होते.

उन्हे सिर्फ अपने महलों को बचाने में दिलचस्पी है और उन्हे हमारे अधिकारों में कोई दिलचस्पी नहीं है.”

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