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Saturday, February 7, 2026
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Indra Saheb

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इन्द्रा साहेब जन्म उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले के कर्मा जगदीशपुर, नौगवां, अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र में हुआ। उनके पिता श्री तिलकधारी और माता श्रीमती इन्द्रावती हैं। बचपन से ही सामाजिक भेदभाव को देखकर उनके बाल मन ने सवाल उठाने शुरू किए, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने पितृसत्तात्मक परंपरा को तोड़ते हुए अपनी माता के नाम इन्द्रा को अपना सरनेम चुना, जो नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है। इन्द्रा साहेब एक प्रख्यात कवि, लेखक, शोधकर्ता, राजनैतिक विश्लेषक, सामाजिक चिंतक और प्रेरक वक्ता हैं। उनकी शोधपरक लेखनी और विचारों ने भारत और विश्व स्तर पर पाठकों का ध्यान आकर्षित किया है। उनकी पुस्तक ‘मान्यवर कांशीराम साहेब संगठन-सिद्धांत एवं सूत्र’ (A-LEF Series-1, 2021) को विद्वानों ने खूब सराहा। इसके बाद A-LEF Series-2 & 3: राष्ट्र निर्माण की ओर (लेख संग्रह) भाग-1 व 2 प्रकाशित हो चुकी हैं, जो अमेज़न, फ्लिपकार्ट और गूगल बुक्स पर उपलब्ध हैं। इन्द्रा साहेब ने सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आंदोलनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने दीक्षा दीप महोत्सव, अम्बेडकर महोत्सव, संविधान महोत्सव, मान्यवर महोत्सव और माया महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से बहुजन वैचारिकी और महानायकों/महानायिकाओं के संघर्ष व संदेशों को जन-जन तक पहुँचाया। साथ ही, दीक्षा माह, अम्बेडकर माह, संविधान माह, मान्यवर माह और माया माह जैसे उत्सवों की शुरुआत कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों के विचारों को प्रचारित किया। उनका व्यक्तित्व, कृतित्व, चिंतन और संघर्ष युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों पर उनके लेख विश्लेषणात्मक और उपयोगी हैं। एक युवा आइकॉन के रूप में इन्द्रा साहेब समाज में बदलाव के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

मान्यवर साहेब पर कँवल भारती के आधारहीन आरोप

कँवल भारती द्वारा अनुवादित हमने पहली किताब 'मिस मेयो कैथरीन' का शोधग्रंथ 'मदर इण्डिया' पढ़ा। इसके बाद इनकी लिखी कई किताबों संग फॉरवर्ड प्रेस...

राम की ख़ोज

भारतीय संस्कृति में दो राम: निर्गुण बनाम सगुण का दार्शनिक और सामाजिक विश्लेषण भारतीय संस्कृति में ‘राम’ के दो अलग-अलग स्वरूपों का उल्लेख मिलता है,...

राम और श्रीराम में फर्क है

राम और श्रीराम : निर्गुण बनाम सगुण का दार्शनिक और सामाजिक विश्लेषण भारतीय संस्कृति और परंपरा में ‘राम’ शब्द दो अलग-अलग संदर्भों में प्रकट होता...

महिला सुरक्षा की आड़ में दलितों को दफ़न करने की नापाक साज़िश

कोलकाता बलात्कार कांड: महिला सुरक्षा, सामाजिक असमानता और सुनियोजित षड्यंत्र का सच कोलकाता में हाल ही में हुए बलात्कार और हत्या के मामले ने पूरे...

‘कृतज्ञता’ महान व्यक्तित्व (बहनजी) का गुण है

भारत के राजनीतिक क्षितिज पर बहनजी एक ऐसी शख्सियत हैं, जो राजनैतिक लाभ-हानि के संकीर्ण दायरे से ऊपर उठकर निर्णय लेती हैं। उनकी स्पष्टवादिता...

दलितों को बांटने की साज़िश कांग्रेस की है

कांग्रेस का षड्यंत्र : दलितों को बांटने की साजिश और बहुजन समाज का भविष्य भारतीय राजनीति में दलित और बहुजन समाज को एकजुट और सशक्त...

बाबासाहेब को जानने वाले ज्यादा हैं परन्तु उनकी मानने वाले बहुत कम

किसी जन समुदाय पर गौर किया जाय तो किसी मुद्दे, एजेण्डे या विचारधारा को लेकर एक सामान्य पैटर्न देखने को मिलता है कि कितनी...

मोदी सरकार की अस्थिरता: मध्यावधि लोकसभा आमचुनाव की आहट

आज (24.06.2024) आठ्ठारहवीं लोकसभा की शुरुआत हो रही है। यह बसपा की सूझबूझ और रणनीति का परिणाम कि किसी दल पूर्ण बहुमत नहीं मिला।...

बसपा ने वंचित समाज को राजनैतिक तौर पर चैतन्य समाज बना दिया है

"बसपा: भारतीय लोकतंत्र में बहुजन क्रांति की मशाल" भारतीय राजनीति और समाज के वर्तमान परिदृश्य में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विरुद्ध एक सुनियोजित दुष्प्रचार...

हमारे कार्यकर्ता ही हमारी मीडिया हैं

आधुनिक समय में समतामूलक समाज सृजन के आन्दोलन को राष्ट्रपिता ज्योतिबा फूले के बाद छत्रपति शाहूजी महाराज ने आगे बढ़ाया। इसके बाद बाबासाहेब ने...

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